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बिहार
शोक नदी कोसी के इलाके में जलप्रबन्धन
Posted on 03 Mar, 2015 01:35 PMसुपौल जिला के ग्रामीणों और ग्राम्यशील द्वारा 200 एकड़ प्रत्यक्ष जल जमाव क्षेत्र एवं अप्रत्यक्ष 1
मखाने की खेती से किसान हुए खुशहाल
Posted on 15 Feb, 2015 04:19 PMसरकार का ध्यान मखाने की खेती की ओर गया है। इसी का नतीजा है कि पहलेप्राचीन मिथिला में पोखर परम्परा
Posted on 10 Feb, 2015 01:39 PMप्रायः पुण्य के लोभ के कारण, सिंचाई एवं जल की अन्य आवश्यकताओं तथा कीर्ति की आकांक्षाओं के कारण पोखर खुदवाने की परम्परा बहुत प्रचलित थी। पर पोखर के रूप में पोखर की मान्यता तभी होती थी जब उसका यज्ञ हो जाए। इसलिये यज्ञ और उत्सर्ग का विधान पोखर खुदवाने का अत्यंत आवश्यक अंग बन गया। यज्ञ के पश्चात् पूरे समाज को उस पोखर के जल और मछली, मखाना, घोंघा, सितुआ जैसी जल की वस्तुओं के स्वच्छन्द उपयोग का अधिकारबिहार में बांध : आतंक बनाम आकर्षण
Posted on 10 Feb, 2015 11:17 AMबिहार में छोटी-बड़ी कई-कई नदियों को बांधने का सिलसिला युद्धस्तर पर जारी है। कहीं लम्बे-ऊँचे तटबंध, कहीं बड़े-बड़े बांध और बराज। नदियों को बांधने की बड़ी-बड़ी परियोजनाएं जैसे एक ‘महायुद्ध’ की विविध कड़ियां हैं। यह महायुद्ध प्रकृति के खिलाफ लड़ा जा रहा है। कहीं इसका लक्ष्य बाढ़ पर नियंत्रण है और कहीं सुखाड़ पर विजय। इन वृहत् परियोजनाओं की निरंतर बढ़ती संख्या और वर्षों से जारी सिलसिला जैसे इस मान्यता की पुषबिहार : आहर-पईन प्रणाली
Posted on 09 Feb, 2015 04:15 PMगंगा, बिहार में पश्चिम से प्रवेश करती है और पूरब से निकल जाती है। इस बीच हिमालय से निकलकर उत्तर से आने वाली कई नदियां- घाघरा, गंडक और कोसी वगैरह उससे आकर मिलती हैं। कोसी बिहार की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा तबाही लाने वाली नदी है। मिट्टी बैठने से इसका पेट एकदम छिछला हो गया है और इसमें अक्सर बाढ़ आती रहती है।
फ्लोराइड का जहर पीने को मजबूर खैरा गाँव के लोग
Posted on 05 Feb, 2015 09:25 AMमुंगेर जिले के नक्सल प्रभावित हवेली खड़गपुर प्रखण्ड का खैरा गाँव फ्लोराइड से सबसे अधिक प्रभावित है। यहाँ शुद्ध पानी के लिये पाँच साल पूर्व शुरू कराए गए पेयजलापूर्ति की बड़ी योजना के कार्यारम्भ होने के बावजूद खैरावासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नही हो सका है।
काला पानी की कहानी
Posted on 04 Feb, 2015 04:26 PMपृष्ठभूमि
काला पानी का नाम सुनते ही जे़हन में आज़ादी की लड़ाई के बांकुरों की याद आना स्वाभाविक होता है। अण्डमान और नीकोबार द्वीप समूह में बनी काल कोठरियों की तस्वीरें आँख के सामने उभरने लगती हैं जहाँ देश की आज़ादी के लिए लड़ने वाले उन दीवानों को अंग्रेजों ने न जाने कितनी यातनाएँ दी होंगी। काला पानी की जिन्हें सजा हुई उनमें से लौटने की कल्पना शायद ही किसी ने की हो। कुछ खुशनसीब वहाँ से लौटे जरूर पर उनके दिलों में यह हसरत दबी रह गई कि देश के लिए जान कुर्बान कर देने का उनका सपना अधूरा रह गया।
सुदूर द्वीपों में बनी उन काल-कोठरियों और उससे जुड़ी त्रासदी को जिस किसी ने भी पहली बार काला पानी कहा होगा वह निश्चित ही भविष्य द्रष्टा रहा होगा।
खाद्यान्नों-सब्जियों से अधिक फ्लोराइड ले रहे प्रभावित गाँवों के लोग
Posted on 04 Feb, 2015 12:25 PMअब तक माना जाता रहा है कि फ्लोरोसिस रोग पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा नियत सीमा से अधिक होने की वजह से होता है। इसी सिद्धान्त का अनुसरण करते हुए सरकारें फ्लोराइड प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था कराती है और इसे ही फ्लोराइड मुक्ति का एकमात्र उपाय मानकर चलती है। मगर एक हालिया शोध ने इस स्थापना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।इस शोध के मुताबिक फ्लोराइड प्रभावित इलाकों में उपजने वाले खाद्यान्न और सब्जियाँ भी फ्लोरोसिस का वाहक बन सकते हैं। क्योंकि भूमिगत जल से सिंचित इन फसलों में फ्लोराइड की मात्रा नियत सीमा से अधिक पाई गई है।
गंगा की सफाई के लिये बिहार को पाँच सौ करोड़ रुपए
Posted on 03 Feb, 2015 11:51 AMकेन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री उमा भारती ने मुख्यमन्त्री के साथ की बैठक गंगा घाटों का भी किया निरीक्षण