कुमार कृष्णन

कुमार कृष्णन
मानव के जीवन मरण का सवाल है पर्यावरण संरक्षण
Posted on 04 Aug, 2017 12:29 PM

पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो.

meet on environment issues
बिहार राज्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंच 2017 का उद्घाटन
Posted on 23 Jul, 2017 10:06 AM

वज्रपात की पूर्व जानकारी की तकनीक जल्द लाएँ, खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष उठाएगा:- मुख्यमंत्री
bihar aapda jokhim nunikaran training
सौर ऊर्जा चालित मिनी पाइप जलापूर्ति योजनाओं का उद्घाटन
Posted on 21 Jul, 2016 04:13 PM


हर घर नल का जल देने के निश्चय की ओर एक महत्त्वपूर्ण शुरुआत - मुख्यमंत्री
खैरा की योजना पूरी न होने पर चिन्ता का इजहार

पानी को बनाया जा रहा है मुनाफे का साधन
Posted on 10 Mar, 2016 04:15 PM

पानी प्रकृति से सबको नि:शुल्क मिलता है, तो कुछ लोगों का ही पा
सिमोन के हौसले को सलाम
Posted on 07 Mar, 2016 11:44 AM

15 वर्ष की उम्र में सिमोन उरांव ने झरिया नाला को बाँधने का साहसिक निर्णय लिया। अपने पिता

काकासाहेब कालेलकर सम्मान से मीनाक्षी अरोड़ा समेत पाँच सम्मानित
Posted on 25 Jan, 2016 01:24 PM

नई, दिल्ली, 24 जनवरी। गाँधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान और वर्मा न्यूज एजेंसी, हिसार की ओर से काकासाहेब कालेलकर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिन पांच श्रेणियों में पांच लोगों को पुरस्कार दिया गया वे हैं; साहित्य के लिये लालबहादुर मीरामोर को, जल पर केन्द्रित लेखन के लिये पत्रकारिता सम्मान मीनाक्षी अरोड़ा को, शिक्षा के लिये डॉ. मृदुला वर्मा को, समाज सेवा के लिए घरेलू कामगारों के मुद्दे पर काम कर रही सुनीता रानी मिंज और महात्मा गाँधी की कर्मभूमि चम्पारण में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के काम में पिछले दो दशकों से जुटे दिग्विजय कुमार को भी समाजसेवा के लिये काकासाहेब कालेलकर सम्मान दिया गया। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि जनसत्ता के सम्पादक मुकेश भारद्वाज थे। इस मौके पर गाँधी स्मृति और दर्शन समिति के निदेशक दीपंकर श्रीज्ञान, गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान के सचिव अशोक कुमार और मुम्बई से आई युवा साहित्यकार रीता दास राम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थीं। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गंगेश गुंजन ने की।

इण्डिया वाटर पोर्टल न सिर्फ जल पर ​केन्द्रित ज्ञान लोगों के बीच साझा करता है बल्कि विदेशों के शैक्षणिक संस्थानों में सुगम हिन्दी सिखाने का माध्यम है। इण्डिया वाटर पोर्टल का हिन्दी में आरम्भ होना कहीं-न-कहीं उनके इस नज़रिए का द्योतक है। स्थापना काल से लेकर अब तक के सफर में पाठकों के बीच काफी लोकप्रियता अर्जित की है। उसी का नतीजा है कि आज हर माह दो लाख पाठक इसे पढ़ते हैं। जल के मुद्दे पर समग्र जानकारी देने वाला हिन्दी का यह पोर्टल जल के ​विविध आयामों से जहाँ लोगों को जागरूक कर रहा है वहीं मौजूदा चुनौतियों के प्रति भी जागरूक कर रहा है।

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