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ਕੀਟ ਵਿਗਿਆਨ ਦਾ ਇੱਕ ਅਨੋਖਾ ਸਕੂਲ
Posted on 11 Dec, 2012 01:08 PM ਇੱਕ ਕਿਸਾਨ ਜਦ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਫ਼ਸਲ 'ਤੇ ਕਿਸੇ ਕੀੜੇ ਨੂੰ ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਿਹੜਾ ਵਿਚਾਰ ਉਸਦੇ ਮਨ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ?
मैं भविष्य देख सकता हूं
Posted on 08 Dec, 2012 03:11 PM हिमयुग हमारी सृष्टि की एक महत्वपूर्ण घटना है जो घटती है अर्थात यह एक चक्रीय प्रक्रिया है। जैसे गर्मी के बाद ठंड का मौसम आता है और ठंड के बाद गर्मी का मौसम। इसी तरह ग्लोबल वार्मिंग के बाद हिमयुग आता है।
कोरी नहीं शीतयुग की बात
Posted on 08 Dec, 2012 03:03 PM

हिमालय सदियों से देश व समाज की सभी प्राकृतिक उत्पादों से सेवा करता रहा है। सही मायनों में सर्वव्यापी हिमालय को दे

Ice age
लगातार बढ़ रहा है मौसमी आपदाओं का खतरा
Posted on 08 Dec, 2012 02:56 PM दुनिया भर में मौसम में होने वाले बदलाव जन जीवन को प्रभावित कर रहे
रहिमन पानी राखिए...
Posted on 05 Dec, 2012 05:21 PM आज हम पानी की समस्या से जुझ रहे हैं। पूरी तरह सूखे से हम छुटकारा नहीं पा सके हैं। सूखा कहीं भी और कभी भी पड़ सकता है। सूखा या अकाल पहली बार नहीं आएगा। लेकिन उस अकाल में कुछ ऐसा होने वाला है जो पहले कभी नहीं हुआ। इस दौर में सबसे सस्ती कारों के साथ सबसे महंगी दालें मिलने वाली हैं – यही इस अकाल की सबसे भयावह तस्वीर होगी।
शहरों को पानी चाहिए, पर पानी दे सकने वाले तालाब नहीं। तब पानी ट्यूबवेल से ही मिल सकता है। पर इसके लिए बिजली,डीजल के साथ-साथ उसी शहर के नीचे पानी चाहिए। एक बात साफ है कि लगातार गिरता जल स्तर सिर्फ पैसे और सत्ता के बल पर थामा नहीं जा सकता। कुछ शहरों ने दूर बहने वाली किसी नदी से पानी उठा कर लाने के बेहद खर्चीले और अव्यावहारिक तरीके अपनाए हैं। महाभारत युद्ध के समाप्त हो जाने के बाद श्रीकृष्ण कुरुक्षेत्र से अर्जुन को साथ लेकर द्वारिका जा रहे थे। उनका रथ मरुप्रदेश पार कर रहा था। आज के जैसलमेर के पास त्रिकुट पर्वत पर उन्हें उत्तुंग ऋषि तपस्या करते हुए मिले। श्रीकृष्ण ने उन्हें प्रणाम किया और फिर वे मांगने को कहा। उत्तुंग का अर्थ है ऊंचा। सचमुच ऋषि ऊंचे थे। उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। प्रभु से प्रार्थना की कि यदि मेरे कुछ पुण्य हैं तो भगवान वर दें कि इस क्षेत्र में कभी जल का अभाव न रहे। एक दौर था जब मरुभूमि को इस तरह के आशीर्वाद की जरूरत थी। मरुभूमि के अलावा पानी की कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन हमने पानी की अहमियत नहीं समझी। आज पानी हमें परेशान कर रहा है। आज हमारे समाज के बड़े हिस्से को इस आशीर्वाद की जरूरत पड़ती है।
water
मौसम में है बड़ी उथल-पुथल
Posted on 05 Dec, 2012 04:41 PM हमारी दुनिया एक ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रही है जिसमें ग्रीष्म लहर हो या शीतोष्ण प्रभाव वह लगातार बढ़ने वाला है। अभी तक हो यह रहा था कि 20 सालों में एक दिन ऐसा होता था जिस दिन गर्मी के रिकार्ड टूटते थे लेकिन अब ऐसा हर दो साल में होने की आशंका होगी।
आएगा बर्फीला युग
Posted on 05 Dec, 2012 01:29 PM हिमयुग को लेकर कई सिद्धांत और परिकल्पनाएं हैं। लेकिन नासा की हाल की रिपोर्ट ने इसे लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। दरअसल ग्लोबल वार्मिंग के चलते ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघल रही है जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा अब ग्लोबल कूलिंग की ओर बढ़ रहा है।
महान वाश यात्रा
Posted on 03 Dec, 2012 10:59 AM निर्मल भारत यात्रा। यह लगभग 500 लोगों द्वारा पूरी की गई 2000 किलोमीटर की एक रोमांचक यात्रा थी। यह यात्रा. पाँच राज्यों- वर्धा (महाराष्ट्र), इंदौर (मध्य प्रदेश), कोटा (राजस्थान), ग्वालियर (मध्य प्रदेश), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) और बेतिया (बिहार) के छह बड़े कस्बों से होकर गुजरी। प्रत्येक कस्बे में यात्रा के पड़ाव के दौरान एक काफी बड़े मैदान में
निर्मल भारत यात्रा के उद्घाटन पर प्रेस को सम्बोधित करते हुए
निर्मल भारत यात्रा, 2 अक्टूबर से 19 नवम्बर
Posted on 27 Nov, 2012 08:54 AM

एक बहुत ही रोमांचक, मसालेदार और मजेदार अभियान


पर्याप्त साफ-सफाई का अभाव भारत में एक बड़ी समस्या है। 67 करोड़ भारतीयों को अभी भी खुले में शौच जाना पड़ता है। खुले में शौच की वजह से ही प्रतिदिन 1000 बच्चों को जान गंवानी पड़ती है। इस बात को आप ऐसे समझ सकते हैं कि भारत सरकार को देश के कुल बजट में से काफी धन स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना पड़ रहा है।
निर्मल भारत यात्रा में जयराम रमेश
ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਵਿਚ ਗਊ ਦਾ ਮਹੱਤਵ
Posted on 31 Oct, 2012 01:10 PM ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਗਊ ਹਮੇਸ਼ਾ ਤੋਂ ਹੀ ਖੇਤੀ ਦਾ ਧੁਰਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਖੇਤੀ, ਖੇਤੀ ਵਿਚਲੀਆਂ ਕਿਰਿਆਂਵਾਂ ਸਭ ਗਊ ਦੇ ਦੁਆਲੇ ਹੀ ਘੁੰਮਦੀਆਂ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਗਊ ਦੇ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਸਾਡੀ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਉਪਜਾਊ ਬਣਾਉਂਦੀ ਰਹੀ ਹੈ। ਪਰ ਜਦ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖੇਤੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਈ ਤਾਂ ਗਊ ਦੇ ਗੋਬਰ ਦੀ ਥਾਂ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀ ਏ ਪੀ ਜਹੀਆਂ ਖਾਦਾਂ ਨੇ ਲੈ ਲਈ ਜਿਸਦਾ ਨਤੀਜ਼ਾ ਅੱਜ ਸਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ
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