साक्षात्कार

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शहरों के बढ़ते प्रदूषण से बचाएगा नेसोफिल्टर
Posted on 06 Jan, 2018 10:29 AM
नई दिल्ली। दिल्ली आईआईटी के तीन पूर्व छात्रों और प्रोफेसरों की टीम ने शहरों में बढ़ते प्रदूषण से बचने के लिये एक ऐसे यंत्र का निर्माण किया है, जो प्रदूषण की मार से बचाने में कारगर साबित हो सकता है। इस यंत्र को बनाने में राजस्थान के दो छात्रों की मुख्य भूमिका रही है। बीकानेर के प्रतीक शर्मा और उदयपुर के तुषार वैश्य का साथ दिया है उत्तर प्रदेश के जतिन केवलानी ने। आईआईटी के तीनों पूर्व छ
जागरुक करने के लिये कला को बनाया माध्यम
Posted on 30 Nov, 2017 03:05 PM
अगर लंदन की टेम्स नदी को पुनर्जीवित किया जा सकता है तो फिर यमुना को क्यों नहीं। ये कहना है कि मुम्बई के 37 वर्षीय कलाकार भूषण कल्प का। भूषण अपनी कला के जरिए दिल्ली में यमुना नदी किस तरह खत्म हो रही है, इस पर रोशनी डाल रहे हैं। भूषण ने बताया कि किस तरह कला बदलाव का सबसे महत्त्वपूर्ण जरिया बन सकती है। इसकी मदद से लोग ये समझेंगे कि यमुना को पुनर्जीवित करने के लिये क्या करने की जरूरत है। इसमे
सिंचाई के अभाव में अब नहीं सूखने दिए जाएंगे बुन्देलखण्ड के खेत
Posted on 22 Jun, 2017 12:49 PM
उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से ‘दैनिक भास्कर’ की विशेष बातचीत
नेतृत्व और निष्ठा का संकट
Posted on 01 Apr, 2017 12:51 PM
एक तरफ विफल होता सुखोमाजरी है तो दूसरी तरफ रालेगण सिद्धि की आदर्श गाँव की छवि पर सवालिया निशान लग रहे हैं। जल संचयन, सम्भरण व संरक्षण की मिसाल रहे अन्ना हजारे के इस गाँव में टैंकरों से पानी की आपूर्ति भावी संकट का संकेत है? अन्ना हजारे ने जल संचयन के लिये विख्यात गाँवों की चुनौतियों के बारे में सुष्मिता सेनगुप्ता के साथ विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसके प्रमुख अंश :
अन्ना हजारे
शब्दों की चौकीदारी संभव नहीं-अनुपम मिश्र
Posted on 19 Dec, 2016 12:56 PM

अनुपम मिश्र पानी और पर्यावरण पर काम करने के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के साथ उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया जिसका दूरगामी दृष्टि दिखती है। उन्होंने अपनी किताब पर किसी तरह का कापीराईट नहीं रखा। इस किताब की अब तक एक लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। मीडिया वर्तमान स्वरूप और कापीराईट के सवाल पर हमने विस्तृत बात की। यहां प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-

कापीराईट को लेकर आपका नजरिया यह क्यों है कि हमें अपने ही लिखे पर अपना दावा (कापीराईट) नहीं करना चाहिए?
कापीराईट क्या है इसके बारे में मैं बहुत जानता नहीं हूं। लेकिन मेरे मन में जो सवाल आये और उन सवालों के जवाब में मैंने जो जवाब तलाशे उसमें मैंने पाया कि आपका लिखा सिर्फ आपका नहीं है।

अनुपम मिश्र
जिद से बदल दी आबोहवा
Posted on 02 Oct, 2016 04:09 PM
जेजांग चीन का एक प्रान्त है जो कुछ वर्ष पहले तक प्रदूषण की गिरफ्त में था। फैक्टरियों से निकलने वाली गन्दगी ने इस प्रान्त की सूरत बिगाड़ दी थी। आसपास की नदियों की भी दुर्दशा थी। असल में ऐसा इसलिये हुआ था क्योंकि इस प्रान्त में उद्योगीकरण तेज रफ्तार से हुआ था।
जिन हाओ के अभियान की सराहना करते पदाधिकारी
प्रकृति और परम्परागत इल्म को बचा रहे हैं टेरो
Posted on 29 Sep, 2016 04:46 PM
स्नोचेंज कोअॉपरेटिव के टेरो मस्टोनेन को इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन की ओर से इस वर्ष का ‘इमर्जिंग रीवर प्रोफेशनल अवार्ड’ दिया गया है।
नदियों से मित्रता का मिला ईनाम
Posted on 25 Sep, 2016 10:21 AM
बफेलो नियाग्रा रीवरकीपर एक सामुदायिक संगठन है। इस संगठन को इस साल थीस इंटरनेशनल वाटरप्राइज अवार्ड दिया गया है। इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 19वें इंटरनेशनल रीवर सिम्पोजियम में संगठन के प्रतिनिधि जे. बर्नोस्की और सुजैन कोर्नाकी को यह पुरस्कार सौंपा गया। संगठन को यह अवार्ड नदियों और नदियों के बेसिन के संरक्षण, उनकी सुरक्षा के लिये दिया गया है। बतौर पुरस्कार 2 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर दिया गया। पिछले वर्ष इस संगठन को नॉर्थ अमेरिकन रीवरप्राइज अवार्ड दिया गया था।

यहाँ यह भी बताते चलें कि इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन ने इस पुरस्कार की शुरुअात 1999 से की थी और अब तक 15 संगठनों को यह पुरस्कार मिल चुका है।
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