भारत

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तब हम खाएँगे क्या
Posted on 30 Apr, 2018 02:40 PM


धरती की आबोहवा बदल रही है और भविष्य में खाद्यान्न की उपज खतरे में है। 132 करोड़ की जनसंख्या वाले देश के नीति-नियन्ता और वैज्ञानिक परेशान हैं कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के गिरते स्तर के कारण फसलोत्पादन में होने वाली गिरावट को कैसे रोका जाये।

सूखा
कृषि विज्ञान में भी बेहतर करियर
Posted on 30 Apr, 2018 01:49 PM


वर्तमान दौर में जबकि शिक्षा के क्षेत्र में तरह-तरह की सम्भावनाएँ सजीव हो रही हैं तो कृषि विज्ञान भी करियर के क्षेत्र में मील का पत्थर बन सकता है। सरकार भी इस समय कृषि विज्ञान की तरफ ज्यादा मुखातिब है। इसी के मद्देनजर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अखौरी वैशम्पायन से हमारे संवाददाता सोहनलाल ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है उसी के अंश

अखौरी वैशम्पायन
यह विकास जोड़ने के बजाय तोड़ता है
Posted on 29 Apr, 2018 06:38 PM
इस बार की थीम नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर आधारित है। दो दिनों तक नर्मदा की
जीवन में जहर घोलता पानी
Posted on 29 Apr, 2018 05:31 PM हाल में जल-गुणवत्ता के मुद्दे पर हुई एक कॉन्फ्रेंस में हैदराबाद जाना हुआ। जहाँ नलगौंडा से कुछ बच्चे और बुजुर्ग भी आए थे। उनमें से कई दिव्यांग थे, वजह फ्लोरोसिस नामक बीमारी। पानी में फ्लोराइड की अधिक मौजूदगी से फ्लोरोसिस बीमारी होती है। तेलंगाना के पूरे नालगौंडा जिले के भूजल में फ्लोराइड है।
फ्लोरोसिस से पीड़ित कालीबाई
यादों की चोरी
Posted on 29 Apr, 2018 01:02 PM
अल्जाइमर एक गम्भीर समस्या है, फिर भी विज्ञान ने इसके कुछ जटि
बाघ बनाम इंसान का कवि
Posted on 28 Apr, 2018 06:48 PM


गाँव, नदी, जंगल, पहाड़ से लेकर भाषा तक में जो बाजार आ चुका था, केदारनाथ सिंह अपनी कविताओं में बहुत अच्छी तरह से उसकी पहचान कर रहे थे

केदारनाथ सिंह
सिस्मोलॉजी में नौकरी के मौके भरपूर
Posted on 28 Apr, 2018 02:22 PM


सिस्मोलॉजी इंजीनियरिंग की एक ऐसी ब्रांच है, जिसको लोग ज्यादा तवज्जो नहीं देते। मगर करियर के लिहाज से देखें, तो इस क्षेत्र में अपार सम्भावनाएँ हैं।

भूकम्प
समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक
Posted on 27 Apr, 2018 06:46 PM


वर्ष 1907 में पहली बार सिंथेटिक पॉलिमर से सस्ता प्लास्टिक बनाया गया और केवल 111 वर्ष में यह पृथ्वी पर जहर की तरह फैल चुका है। हालात की भयावहता इससे समझी जा सकती है कि 2050 तक हमारे समुद्रों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा।

प्लास्टिक कचरा
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