![500 साल पुराना जलाशय,(PC:-Toi)](/sites/default/files/styles/node_lead_image/public/2023-02/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20500%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%AF%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20.png?itok=HH5ud52I)
भारत के छोटे से पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा की मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली स्यूनराकोट के नौला-धारा (स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले जलभृत) को राष्ट्रीय प्राचीन स्मारक घोषित किया गया है। इस मौके पर एएसआई देहरादून सर्कल हेड मनोज कुमार सक्सेना ने कहा, "केंद्र सरकार ने हाल ही में स्यूनराकोट नौला को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित कर अधिसूचना जारी की थी। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इस जलभृत का संरक्षण कार्य करेगा।"
इसके साथ ही राज्य में संरक्षित स्मारकों की संख्या 44 तक पहुंच गई है। स्यूनराकोट का नौला चंद शासकों द्वारा बनाया गया था जो 14 वीं और 15 वीं शताब्दी में कुमाऊं साम्राज्य के एक हिंदू राजपूत शासक थे ।
बता दे ये नौला ढ़ग से रखरखाव नहीं होने के कारण खंडहर हो रहा था। जिसके बाद एएसआई द्वारा स्थिति का जायजा लिया गया और स्मारक को अपने संरक्षण में लेने के लिए एक साल पहले कार्रवाई शुरू कर दी। इसके लिए संबंधित दस्तावेज औपचारिकताएं पूरी कर केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे गए थे। 23 जनवरी को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने स्यूनराकोट नौला को राष्ट्रीय प्राचीन धरोहर घोषित किया। अगले चरण में एएसआई नौला के 300 मीटर के दायरे में निर्माण और पुनर्निर्माण कार्य की अनुमति मांगेगा। एएसआई के अनुसार, पूर्वाभिमुखी नौला संरचना वर्गाकार है।
इसमें एक 'बाओली' (कुआं) है जिसके आगे एक बरामदा और दो खंभे हैं। इसमें तीन आयताकार कक्ष भी हैं, जिनमें से प्रत्येक पश्चिम, उत्तर और दक्षिण की ओर है। छत पर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं।
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