नदियों को बचाने के लिए बनाने होंगे ट्रिब्यूनल

नदियों को बचाने के लिए बनाने होंगे ट्रिब्यूनल,Pc(flicker hindi water portal)
नदियों को बचाने के लिए बनाने होंगे ट्रिब्यूनल,Pc(flicker hindi water portal)

देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में जाने माने राष्ट्रीय चिंतक एवं विचारक के एन गोविंदाचार्य ने कहा कि देश की नदियों को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक अधिकार प्राप्त ट्रिब्यूनल बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा गंगा की निर्मलता, अविरलता एवं जल संरक्षण के लिए अगल से गंगा एक्ट बनाना चाहिए दो दिन के प्रवास पर उत्तराखंड पहुंचे गोविंदाचार्य ने राजपुर रोड स्थित विश्व संवाद केंद्र में कहा कि नदियों को बचाने के लिए ट्रिब्यूनल बनने चाहिए जिससे की हम नदियों को ना सिर्फ पुनर्जीवित कर सके बल्कि उनका सरंक्षण भी हो सके। जाने माने राष्ट्रीय चिंतक एवं विचारक केएन गोविंदाचार्य ने नदियों को बचाने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए  उन्होंने कहा की बैरियर नदियों के स्वच्छंद प्रवाह में रूकावट डाल रहे हैं। ऋषिकेश- हरिद्वार में कई आश्रमों का सीवरेज आज भी नदियों में मिल रहा है। जबकि मैदानी क्षेत्र में अवैज्ञानिक तरीके से खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा की सहायक नदियां  ना सिर्फ प्रदूषित हो रही हैं बल्कि सूखती भी जा रही हैं।  के एन गोविंदाचार्य ने कहा की लोगो मैं जागरूकता का अभाव है और इसके लिए सरकारें ही नहीं सामाजिक संगठन और आम लोग भी दोषी हैं।  

उन्होंने जोशीमठ आपदा को उदाहरण देते हुए कहा कि यह तो मात्र ट्रेलर है, जिस तेजी से हिमालय और उसकी पारिस्थितिकी से छेड़छाड़ की जा रही है, आने वाले समय में इसके परिणाम भयावह होंगे। उन्होंने कहा कि प्रकृति को ध्यान में रखकर की विकास को गति देनी चाहिये। दूसरी तरफ गोविंदाचार्य ने कहा की भागीरथी नदी को पर्यावरण संवेदी क्षेत्र के नाते चिह्नित किया जाए। उन्होंने बताया कि देश में लोगों का नदियों को उत्तराखंड में बने बांध और तमाम नदियों अलकनंदा, मंदाकिनी और लेकर भावनात्मक लगाव तो बहुत है लेकिन लोग इसके प्रति चिंतित बेहद कम नज़र आते हैं। 

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Post By: Shivendra
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