जेजेएम-महिलाओं का सशक्तिकरण,जीवन हुआ आसान

पीएचईडी  की जांच के दौरान लीला बाई घर के नल से जल भरते हुए
पीएचईडी  की जांच के दौरान लीला बाई घर के नल से जल भरते हुए

घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी ढोकर लाने का संघर्ष जीवन भर का संघर्ष रहा है। जब से मैं शादी के बाद इस गांव में आई हूं, सुबह जल्दी उठना, मटका लेकर बाहर निकलना और इसे लेकर चलना मेरी दिनचर्या रही है। मैं यह कार्य वर्षों से कर रही हूँ। मेरी जवानी के सभी दिन परिवार के सदस्यों की प्यास बुझाने के लिए पानी से भरे बर्तनों को घर लाने में बीते हैं। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि यह अग्निपरीक्षा समाप्त हो गई है। जल जीवन मिशन ने हमारे लिए नल के पानी को एक हकीकत बना दिया है। सरकार ने हमें एक ऐसी सुविधा प्रदान की है जिसके बारे में हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, " बोकाराटा गांव की निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला लीला बाई ने कहा ।

उन्होंने आगे कहा, "मुझे खुशी है कि मुझे अब दूर- दूर से पानी ढोकर नहीं लाना पड़ रहा है क्योंकि इस दैनिक अग्निपरीक्षा ने मेरे स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है। मैं अब बूढ़ी हो गई हूं और इतनी मजबूत नहीं हूं कि पानी इकट्ठा करके अपने सिर पर ले जा सकूं। नल का पानी मेरे घर पहुंच रहा है, अब मुझे किराना (किराने) की दुकान में बैठने और कुछ पैसे कमाने का समय मिलेगा जिससे मुझे अपनी रसोई चलाने में मदद मिलेगी।" यह कहानी है मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित बोकाराटा गांव की। इसमें 12 बस्तियों में 873 परिवार हैं जिनमें 4,921 लोग रहते हैं, जिनमें ज्यादातर आदिवासी हैं।

1988 में, गाँव में एक भूजल योजना का निर्माण किया गया था, जो केवल 29 घरों की ही व्यवस्था पूरा कर पाती थी। समय के साथ गांव की आबादी बढ़ती गई लेकिन उनके पास नल के पानी का कनेक्शन नहीं था। नए परिवार अपनी दैनिक घरेलू जरूरतों के लिए पूरी तरह से 29 हैंडपंपों और कुओं पर निर्भर थे। जल जीवन मिशन (जेजेएम) के शुभारंभ के साथ, 200 किलोलीटर (केएल) ओवरहेड टैंक (ओएचटी) 75 केएल के नाबदान कुएं और 20 केएल के दो अन्य नाबदान-कुओं के साथ गांव में पानी की आपूर्ति योजना का निर्माण किया गया था, जिसके माध्यम से अब पानी की आपूर्ति की जाती है। वितरण से पहले जल को विसंक्रमित करने के लिए सिल्वर आयनीकरण विधि का उपयोग किया जाता है।

जेजेएम के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, फील्ड टेस्ट किट का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए पांच महिलाओं की समिति का गठन किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपूर्ति किया गया पानी पूर्व-निर्धारित गुणवत्ता का है।

जेजेएम ने बड़वानी जिले के बोकाराटा और वालन गांव में लोगों की कठिन मेहनत का अंत कर दिया है। कार्यक्रम की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, स्थानीय ग्राम समुदाय के परामर्श से 60 रुपये का उपयोगकर्ता शुल्क तय किया गया है, जिसे हर महीने प्रत्येक घर से लिया जाएगा। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा सृजित समर्पित बैंक खाते में धनराशि जमा की जाएगी तथा एकत्रित धन एवं किये गये व्यय का विवरण कार्यालय पंजी में रखा जायेगा तथा पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनता को उपलब्ध कराया जायेगा। इस प्रकार एकत्र किए गए धन का उपयोग पंप संचालक को पारिश्रमिक देने और समय-समय पर मामूली मरम्मत कार्य करने के लिए किया जाएगा।

वर्षा जल के संचयन, जो अन्यथा नीचे की ओर बह जाता है, के लिए गांव में एक बोल्डर चेक डैम का निर्माण किया जा रहा है। पुष्कर धरोवर सुमृधि योजना के अंतर्गत दो स्टॉप डैम और 3 चेक डैम के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यह आगे यह सुनिश्चित करने का तरीका है कि स्रोत लंबे समय तक टिकाऊ बना रहे। भूजल पुनर्भरण स्रोत सुदृढ़ीकरण के तहत एक महत्वपूर्ण घटक है ताकि ग्रामीणों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरे वर्ष भर भूजल स्रोत उपलब्ध रहे।इस तरह जल जीवन मिशन देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन ला रहा है।

स्रोत: -जल-जीवन संवाद, अंक 22 , जुलाई  2022   

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Post By: Shivendra
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