भारत,लाल सागर व्यापार मार्ग में जहाज़ों के हमलों से चावल व्यापार पर बज रही खतरे की घंटी

लाल सागर मार्ग द्वारा चावल व्यापार
लाल सागर मार्ग द्वारा चावल व्यापार

भारत, दुनिया में गेहूं, चावल और चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है एवं बासमती चावल के प्रमुख निर्यातकों में से एक है।
मुख्य रूप से 1121 बासमती चावल-सफेद, पूसा बासमती 1121,पारंपरिक बासमती चावल, गोल्डन सेला बासमती चावल, सुगंधा  बासमती चावल, शरबती बासमती चावल भारत से एक्सपोर्ट होते हैं अतः यह भारत की अर्थव्यस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

लेकिन, हाल ही में लाल सागर के हमलों के प्रभाव से भारत के चावल व्यापार को खतरा हो सकता है। विशेष रूप से, भारतीय बासमती चावल की एक विशेष किस्म, जिसे लाल सागर कहा जाता है, इस आपूर्ति श्रृंखला में प्रभावित हो सकती है। वैश्विक व्यापार के लिए लाल सागर का रणनीतिक महत्व बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के कारण है जो यमन और जिबूती के बीच स्थित है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त कार्गो और तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है और लगभग 12% अंतर्राष्ट्रीय माल व्यापार यहीं से होकर गुजरता है।

इसका असर व्यापारिक लोगों और उनके व्यापारिक नेटवर्क पर हो रहा है, क्योंकि यह व्यापारी जहाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है।  यमन में हूती विद्रोहियों ने कमर्शियल मालवाहक जहाज़ों पर हमले किए हैं, जिससे व्यापारिक लोगों को यह बाध्य कर दिया है कि वे इस रास्ते से अपने जहाज़ न भेजें।  इन हमलों को अंजाम दे रहे हूती विद्रोही खुद को हमास का समर्थक बताते हैं और उनका कहना है कि वे उन जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं जो इसराइल की तरफ़ जा रहे हैं। 

व्यापारिक नेटवर्क को इस विद्रोह से अधिक विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह व्यापारिक लोगों के लिए व्यापार की आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। 

लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर लगातार हमले के बाद, भारत के चावल व्यापार को खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से भारतीय बासमती चावल की एक विशेष किस्म जिसे लाल सागर कहा जाता है, इस आपूर्ति श्रृंखला में प्रभावित हो सकती है। यह विद्रोहियों द्वारा किए जाने वाले हमलों के कारण हो रहा है।

इसका असर व्यापारिक लोगों और उनके व्यापारिक नेटवर्क पर हो सकता है क्योंकि यह व्यापारी जहाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यमन में हूती विद्रोहियों ने कमर्शियल मालवाहक जहाज़ों पर हमले किए हैं, जिससे व्यापारिक लोगों को यह बाध्य कर दिया है कि वे इस रास्ते से अपने जहाज़ न भेजें इन हमलों को अंजाम दे रहे हूती विद्रोही खुद को हमास का समर्थक बताते हैं और उनका कहना है कि वे उन जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं जो इसराइल की तरफ़ जा रहे हैं।

व्यापारिक नेटवर्क को इस विद्रोह से अधिक विचार करने की आवश्यकता हो सकती है, और यह व्यापारिक लोगों के लिए व्यापार की आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर लगातार हमले के बाद, भारत के चावल व्यापार को खतरा हो रहा है। नवंबर 2023 से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करने के एक व्यापक रणनीति के तहत, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मालवाहक जहाजों पर हमला किया है। इसके परिणामस्वरूप, कुछ भारतीय जहाज़ों को इस रास्ते से गुज़रने से बचने के लिए अपने यातायात मार्गों को बदलने का निर्णय लिया है कि यमन में हूती विद्रोहियों ने वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों पर भी हमले किए हैं, जिससे व्यापारिक जहाजों को दक्षिण अफ्रीका के सुरक्षित समुद्री मार्ग से होकर गुज़रना पड़ रहा है। इस घातक वाणिज्यिक असर के चलते, भारत के कुल निर्यात में लगभग 2,500 अरब रुपये की गिरावट हो सकती है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के सामने भारत ने अपने युद्धपोतों को अरब सागर में तैनात किया है, जिसमें समुद्री कमांडोज के साथ 10 से अधिक युद्धपोत शामिल हैं2. यह कदम भारत के व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली को बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ सकता है जिसकी निर्यात आय (अप्रैल- दिसंबर 2023 की अवधि के लिए) 3.97 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। नवंबर 2023 में तेहरान की आधिकारिक यात्रा पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से कहा कि हमले "... अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चिंता का विषय" थे और "जाहिर है इसका भारत की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर पड़ता है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि यह तनावपूर्ण स्थिति किसी भी पार्टी के लाभ के लिए नहीं है और इसे स्पष्ट रूप से पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने और ईरानी विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने संयुक्त बयान में  हूती हमलों को "हिंद महासागर के इस महत्वपूर्ण हिस्से में समुद्री वाणिज्यिक यातायात की सुरक्षा के लिए खतरों में उल्लेखनीय वृद्धि" के रूप में देखा गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बातचीत की है। इस बातचीत का मुख्य विषय था लाल सागर में भारतीय नौवहन के खिलाफ हाउथिस के अप्रत्याशित हमलों का मुद्दा। यह घटना पश्चिम एशिया में व्यापक भू-राजनीतिक स्थिति की पृष्ठभूमि में हुई।  

इस बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट में कहा, "मेरे भाई माननीय प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुल्ल अज़ीज़ अल सऊद के साथ बातचीत अच्छी रही. उनसे सऊदी अरब और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर चर्चा हुई।" इस बातचीत में विशेष ध्यान दिया गया था क्योंकि इस समय इसराइल और हमास के बीच दो महीने से ज्यादा समय से युद्ध जारी है और लाल सागर में जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमले ने समुद्री यातायात को प्रभावित कर दिया है।  

लाल सागर नौवहन पर यमन स्थित  हूती हमलों का प्रभाव न केवल वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर ही पड़ा है, बल्कि भू-राजनीति पर भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका और भारत ने प्रतिक्रिया देने में बहुत कम समय लिया, अपने नौसेना संसाधनों को झोंक दिया और यह सुनिश्चित किया कि बड़े इज़राइल-हमास संघर्ष की पृष्ठभूमि के खिलाफ वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रहें।

हमास-इसराइल युद्ध के दौरान, जो 7 अक्टूबर को शुरू हुआ था, गाज़ा पर इजरायल की असंगत सैन्य प्रतिक्रिया के लिए एक बड़ी सी अज्ञात जगह छिपी हुई है, जिसे भविष्य कहा जाता है  इस युद्ध में खतरनाक और दर्दनाक घटनाएं घटीं थीं, खासकर इसराइली कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले फ़लस्तीनियों के लिए।अब, लाल सागर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है। यह स्वेज़ नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़ता है और तेल निर्यात सहित 2023 में वैश्विक व्यापार का अनुमानित 10-15 प्रतिशत था  वैश्विक कंटेनर शिपिंग मात्रा का 25-30 प्रतिशत भी स्वेज से होकर गुजरता है।

भारत की नीले पानी की क्षमताएं वाक़िया में बढ़ गई हैं। इसका प्रमुख कारण 2010 और 2024 के बीच सोमालियाई समुद्री डाकुओं के खिलाफ भारतीय नौसेना की त्वरित कार्रवाई है। नई दिल्ली ने एक अधिक सक्रिय समुद्री भूमिका निभाने की मांग की है, जो इसके शिपिंग और आपूर्ति श्रृंखला के हितों की रक्षा के लिए उन्मुख है।

यमन के हूती  विद्रोहियों द्वारा वाणिज्यिक नौवहन पर मिसाइल और ड्रोन से होने वाले हमलों के प्रभाव के बारे में सही बताया गया है कि यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी के ड्रोन के माध्यम से वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने के इरादे की घोषणा की गई है। यह हमले तटों से बहुत दूरी पर चल रहे जहाजों पर भी किए गए हैं, जो इस क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना द्वारा सैनिक हस्तक्षेप पर भी प्रश्नचिह्न आरोपित करते हैं। यमन के हूती  विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन द्वारा इजरायल से जुड़े समुद्री वाणिज्य को निशाना बनाने के अपने इरादे की घोषणा की है। यह हमले तटों से बहुत दूरी पर चल रहे जहाजों पर भी किए गए हैं, जो इस क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना द्वारा सैनिक हस्तक्षेप पर भी प्रश्नचिह्न आरोपित करते हैं। जोखिमों का आकलन करने और प्रभावी जवाबी प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए इन हमलों की प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है।  

नवंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच, शंघाई से चेन्नई तक माल ढुलाई की लागत में 144% की वृद्धि देखी गई है। इस अवधि में, भारत से अमेरिका और यूरोप तक फार्मास्यूटिकल्स और कारों जैसे कुछ क्षेत्रों में माल ढुलाई की लागत 40-50% बढ़ गई है। यह बढ़ती लागत लाल सागर संकट के कारण हो रही है, जिसके चलते जहाजों के लंबे रास्तों पर माल ढुलाई की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप, भारत के बासमती निर्यात पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि यह उत्पादन लाल सागर के माध्यम से पश्चिम एशिया, यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में भेजा जाता है।  

भारत के कुल निर्यात में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। केप ऑफ गुड होप के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग के परिणामस्वरूप शिपिंग लागत बढ़ गई है।

हूती हमले शुरू होने के ठीक एक महीने बाद, ऐसी आशंका थी कि बासमती निर्यात की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। हालांकि भारत सरकार को बासमती की मांग प्रभावित होने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि लाल सागर पर लंबे समय तक अशांति के कारण कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।

वही उर्वरक, सूरजमुखी तेल, मशीनरी पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान के आयात में देरी की खबरें हैं। यह विकास व्यापार में व्यवधान डाल सकता है और उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है।

उर्वरक (Fertilizers): उर्वरक कृषि में उपज बढ़ाने के लिए प्रयुक्त रसायन होते हैं। ये पेड-पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं। भारत में रासायनिक खाद का सर्वाधिक प्रयोग पंजाब में होता है। इनका उपयोग हमें बहुत कम करना चाहिए। जैविक खाद का प्रयोग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि इसके दुष्परिणाम भी कम होते हैं।

खनिज तेल: भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय तक मात्र असम में ही खनिज तेल निकाला जाता था लेकिन उसके बाद गुजरात और बाम्बे हाई में खनिज तेल का उत्पादन बढ़ गया है।

मशीनरी पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान: इन क्षेत्रों में आयात में देरी की खबरें हैं, जो उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकती हैं। इन विकासों के साथ-साथ हमें अपने आयात और उपभोक्ताओं की जेब की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। भारत की आर्थिक स्थिति और व्यवधान के संदर्भ में विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएँ रिपोर्ट 2024 के अनुसार, वैश्विक मुद्रास्फीति में गिरावट का अनुमान है लेकिन विशेष रूप से विकासशील देशों में खाद्य मुद्रास्फीति में एक साथ वृद्धि की चेतावनी दी गई है। इसका मतलब है कि खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति गंभीर बनी हुई है जिससे विशेष रूप से विकासशील देशों में खाद्य असुरक्षा और गरीबी बढ़ रही है।  

भारत के दृष्टिकोण से वर्ष 2023 में दक्षिण एशिया में अनुमानित 5.3% की वृद्धि हुई और 2024 में 5.2% की वृद्धि का अनुमान है। भारत में अधिक विस्तार से प्रेरित है, जो दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है। घरेलू मांग और विनिर्माण तथा सेवाओं में वृद्धि से समर्थित, वर्ष 2024 में भारत की विकास दर 6.2% होने का अनुमान है।  

इसके अलावा, वैश्विक मुद्रास्फीति में भी गिरावट का अनुमान है, जो पिछले दो वर्षों में एक प्रमुख चिंता का विषय रही है। वैश्विक हेडलाइन मुद्रास्फीति वर्ष 2022 में 8.1% से गिरकर 2023 में अनुमानित 5.7% हो गई और वर्ष 2024 में 3.9% होने का अनुमान है  यह अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में जारी नरमी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा  अक्टूबर 2023 के बाद से इज़राइल-हमास संघर्ष की शुरुआत के बाद उत्तरी एशिया से यूरोप तक की शिपिंग दरें पहले ही बढ़ गई थीं और अन्य मार्ग प्रभावित हुए थे। इससे वैश्विक मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है। हौथी हमले वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब यह पहले से ही यूक्रेन और फिलिस्तीन में भूराजनीतिक संकट से जूझ रहा है।

दुबई में 2024 विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में भारत को सम्मानित अतिथि नामित किया गया है। इस सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी भाग लेंगे। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के नेताओं और विशेषज्ञों का साथ होगा जो विश्व अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को हल करने के लिए अपने सरकारी अनुभवों और विकासात्मक प्रथाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे।  

इस सम्मेलन का विषय 'भविष्य की सरकारों को आकार देना' है जिसमें दुनिया भर से 25 से अधिक सरकार और राज्य प्रमुख भाग लेंगे। यह एक महत्वपूर्ण मंच है जो नवाचार का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करता है और मानवता के सामने आने वाली सार्वभौमिक चुनौतियों को हल करने के लिए अगली पीढ़ी की सरकारों और प्रौद्योगिकी के एजेंडे का पता लगाता है।

इस सम्मेलन में भारत के सफल सरकारी अनुभवों और सर्वोत्तम विकासात्मक प्रथाओं का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। इसके साथ ही 120 सरकारी प्रतिनिधिमंडलों और 4,000 उपस्थित लोगों के साथ 85 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के नेताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के विचार भी चीन ने ईरान को बताया है कि अगर हौथिस के लाल सागर हमले जारी रहे तो बीजिंग और तेहरान के बीच आर्थिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों को संदेह है कि चीन लाल सागर में केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, जिस हद तक वह हस्तक्षेप करेगा उसे सीमित कर रहा है।

राज्यों ने हौथी हमलों का विभिन्न तरीकों से जवाब दिया है - वैकल्पिक व्यापार मार्ग ढूंढना या कूटनीति का उपयोग करना - लेकिन कोई ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आया है।
भारत के लिए यह बिल्कुल संभावना है कि यह विदेशी घटनाओं का असर पड़े। आइए देखते हैं कि वह कूटनीतिक समाधान तलाशते हुए आर्थिक क्षति को कैसे कम कर सकता है।

त्रिदिवेश सिंह मैनी, जो कि जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स (जेएसआईए) में सहायक प्रोफेसर हैं, ने अपने विशेषज्ञता के क्षेत्र में अपनी योगदान की ओर बढ़ते हुए भारत के लिए यह संभावना बढ़ाई है। उन्होंने अपने शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से विभिन्न राष्ट्रों के बीच आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहराई से विचार किए हैं।

इसके अलावा, उन्होंने द हिंदू सेंटर फॉर पॉलिटिक्स एंड पॉलिसी में भी अपनी विशेषज्ञता को बढ़ावा दिया, जहां उन्होंने पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय दृष्टिकोण दिखाई। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युवा नेताओं के बीच एशिया सोसाइटी इंडिया-पाकिस्तान रीजनल यंग लीडर्स इनिशिएटिव में भी अपनी योगदान की ओर बढ़ते हुए युवाओं को एक साथ आने के लिए प्रोत्साहित किया। इन सभी कार्यों के माध्यम से, त्रिदिवेश सिंह मैनी ने भारत के आर्थिक और राजनीतिक विकास में अपनी योगदान की ओर बढ़ते हुए एक महत्वपूर्ण योगदान किया है।

स्रोत-डाउन टू अर्थ 

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