भूजल

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Featured Articles
June 13, 2024 The rising trend of abandoning open wells for borewells in Chikkaballapur and Annamayya districts, and the potential negative consequences of this shift.
Borewell proliferation may dry up open wells (Image: FES)
May 19, 2024 The surprising connection between Wikipedia, beaches, and your water bottle.
A top down image of a lush green forest in a sacred grove in Meghalaya (Image created by: Sreechand Tavva)
May 15, 2024 बेहिसाब भूजल दोहन भूकंप के खतरे को विनाशकारी बना देगा। हाल फिलहाल के दो अध्ययन हमारे लिए खतरे का संकेत दे रहे हैं। एक अध्ययन पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भूकंप के आवृत्ति और तीब्रता बढ़ने की बात कर रहा है। तो दूसरा भूजल का अत्यधिक दोहन से दिल्ली-NCR क्षेत्र के कुछ भाग भविष्य में धंसने की संभावना की बात कर रहा है। दोनों अध्ययनों को जोड़ कर अगर पढ़ा जाए तस्वीर का एक नया पहलू सामने आता है।
भूजल का अत्यधिक दोहन
May 12, 2024 Rethinking community engagement in the Atal Bhujal Yojana
Towards sustainable groundwater management (Image: IWMI)
May 8, 2024 What is the ecosystem based approach to water management? How can it help in solving the water woes of states in the Deccan Plateau?
An ecosystem based approach to water management (Image Source: India Water Portal)
March 13, 2024 As cities such as Bangalore grapple with the water crisis, understanding the value of conserving groundwater to prevent this from happening in the future is urgently needed!
Groundwater, a threatened resource (Image Source: India Water Portal)
दिल्ली का लगातार गिर रहा है भूजल स्तर
Posted on 02 Aug, 2010 09:25 AM एक और समस्या यह है कि लोग पुरानी कोठी-बंगलों को तोड़कर फ्लैट या होटल बना रहे हैं। इससे पानी की खपत अचानक कई गुणा बढ़ जाएगी और इलाके में पानी का संकट बढ़ जाएगा। पुरानी मांग के हिसाब से उस कालोनी के लिए पानी का आबंटन है। उसी हिसाब से पाइप लाइन डली है। इससे पाइप लाइन पर भी ज्यादा दबाव पड़ेगा और पाइप फटेगी। इसे रोकने के लिए बोर्ड के पास ठोस कानून नहीं है। भूजल के दोहन को रोकने का भी अधिकार बोर्ड के पास नहीं है। दिल्ली के भूजल का मालिक केंद्रीय भूजल प्राधिकरण है। दिल्ली का जल प्रबंधन लगातार चुनौती बनता जा रहा है। राजधानी में पानी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि जल स्तर हर साल एक मीटर नीचे गिर रहा है। जल बोर्ड की पानी की लाइन दिल्ली की 30 फीसद इलाके में नहीं है। इसके बावजूद जल बोर्ड का घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बोर्ड दिल्ली सरकार से 22 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुका है जिसके लौटने के आसान नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रमेश नेगी का दावा है कि बोर्ड की वसूली बढ़ाने से लेकर पानी का समान बंटवारा करने का प्रयास हो रहा है। इसके बेहतर नतीजे निकल रहे हैं। पानी की चोरी, लीकेज घटाने और
बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर 3 मीटर तक खिसका
Posted on 23 Feb, 2010 02:33 PM


पांच स्थानों पर 2 मीटर, 18 स्थलों पर 1 मीटर गहराया, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने बारिश के बाद की स्थिति बताई, गर्मी में और नीचे जाएगा।

भूजल विकास के लिए नया कायदा
Posted on 21 Sep, 2009 09:10 AM

भूजल विकासासाठी नवा कायदा?

पावसाचा लहरीपणा, पीक नियोजन पद्धतीचा अभाव, पाणी वापराचा चंगळवाद, वाढते नागरीकरण यामुळे भूगर्भातील पाण्याचा साठा कमी होत आहे. भविष्यातील पाण्याची गरज भागवून त्याची शाश्वती देण्यासाठी राज्यात भूजलाच्या अमर्याद उपशावर नियंत्रण आणण्यासाठी 'महाराष्ट्र भूजल विकास आणि व्यवस्थापन अधिनियम २००८'च्या प्रारूपास राज्य मंत्रिमंडळाने मान्यता दिली.
मर्ज बांटती आयड
Posted on 22 Jun, 2009 09:19 AM
उदयपुर। शहर के मध्य से गुजरती आयड नदी के दोनों किनारों से सौ-सौ मीटर तक का भूमिगत जल मानव स्वास्थ्य के लिए हर दृष्टि से हानिकारक साबित हो चुका है। नदी में लगातार बहते गंदे नालों के कारण ही प्रदूषण की यह सौगात मिली है।

हालांकि जिम्मेदार विभागों ने तो कभी नदी क्षेत्र का जल शीशी में भरकर प्रयोगशाला नहीं भेजा, लेकिन बायोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. जी. एस. देवडा व डा. श्वेता शर्मा के निर्देशन में विद्यार्थियों ने अपने शोध में साफ कर दिया कि आयड नदी क्षेत्र का भूमिगत जल किसी भी सूरत में मानव के पीने योग्य नहीं है। इस पानी में विभिन्न बीमारियां फैलाने वाले जीवाणु भी बहुतायत में है। डा. देवडा ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से की गई तुलना में सामने आया कि आयड नदी क्षेत्र का पानी अत्यधिक कठोर और क्षारीय है।
यूपी के महाराजगंज के भूजल में आर्सेनिक की स्थिति
Posted on 25 Apr, 2009 05:21 PM
जल पर्यावरण का जीवनदायी तत्व है. परिस्थितिकी के निर्माण में जल आधारभूत कारक है. वनस्पतियों से लेकर जीव-जंतु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल से करते हैं.
पंजाब के जल में आर्सेनिक का ज़हर
Posted on 04 Apr, 2009 06:48 AM पंज़ाब राज्य का लगभग 80% भूजल मनुष्यों के पीने लायक नहीं बचा है और इस जल में आर्सेनिक की मात्रा अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है… यह चौंकाने वाला खुलासा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये गये एक अध्ययन में सामने आई है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा का सुरक्षित मानक स्तर 10 ppb होना चाहिये, जबकि अध्ययन के मुताबिक पंजाब के विभिन्न जिलों से लिये पानी के नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 3.5 से 688
छत्तीसगढ़ में कांक्रीटीकरण के कारण गिरता भूजल स्तर…
Posted on 26 Mar, 2009 11:14 AM केन्द्रीय भूजल बोर्ड की उत्तर-केन्द्रीय छत्तीसगढ़ शाखा (CGWB) द्वारा हाल में किये गये एक अध्ययन के अनुसार छत्तीसगढ़ में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगाँव, महासमुन्द और दुर्ग जिलों में भूजल स्तर 4 से 7 मीटर तक नीचे जा चुका है, और यह सब हुआ है नवम्बर 2007 से अक्टूबर 2008 के सिर्फ़ एक साल के भीतर। बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कम वर्षा और ज़मीन पर हो रहे निर्माण कार्यों
चूरू का पानी
Posted on 10 Mar, 2009 07:39 AM विश्व भू-जल दिवस आज
भू-जल का अत्यधिक दोहन व पानी बचाने के प्रति जागरूकता के अभाव के कारण जिले का भू-जल स्तर रसातल में जा चुका है। स्थिति ये है कि भू-जल स्तर के लगातार गिरने से पीने योग्य पानी रासायनिक गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा है। बरसात के पानी की बूंद-बूंद नहीं बचाई गई तो वो दिन दूर नहीं जब जिलेवासी पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो जाएंगे।
द डार्क ज़ोन अर्थात अंधकार क्षेत्र
Posted on 22 Sep, 2008 11:32 AM

जब डाउन टू अर्थ संवाददाता निधि अग्रवाल और डीबी मनीषा ने भूमिगत जल में फ्लोराइड और विषाक्‍त पदार्थों पर अपनी रिपोर्ट लिखी तब हम इस समस्‍या के विस्‍तार और घातक प्रभावों की कल्‍पना मात्र से ही सिहर उठे। वास्‍तव में निराशा में लिखी गई एक कहानी है, जिसका नाम - द डार्क ज़ोन है/ यह भूमिगत जल के बारे में उस समय की कहानी है जब पानी (रस) विष में बदल जाता है और जब किसी एक कष्‍टदायी रोग और मौत का कारण बन ज

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