विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day)2023

विश्व महासागर दिवस, Pc-wallpaper cave
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विश्व महासागर दिवस(world oceans day 2023)

विश्व महासागर दिवस 8 जून को पुरे विश्व में मनाया जाता है। महासागर हमारी पृथ्वी सिर्फ जीवन का प्रतीक ही नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन में भी एहम भूमिका निभाता है। महासागरों में गिरने वाले प्लास्टिक प्रदुषण कि वजह से महासागर धीरे -धीरे अपशिष्ट होते जा रहे हैं। इस कारण समुद्री जीवों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है। क्यूंकि समुद्री जीव इसे अपना भोजन समझ कर खा लेते हैं और यही उनकी मृत्यु का कारण बन जाता है।

इतिहास

पहला विश्व सागर दिवस 8 जून 2009 को मनाया गया था। यह दिवस 1992 में रिओ डी जनेरिओ  में हुए  'पृथ्वी गृह ' फोरम में प्रतिववर्ष विश्व महासागर दिवस को  मनाने के फैसले के बाद और साल 2008 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस सम्बन्ध में आधिकारिक फैसला लिए जाने के बाद मनाया जाने लगा। यह दिन अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के समक्ष महासागरों की वजह से आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है।

उद्देश्य

इस दिवस को मानाने का मुख्य कारण विश्व में महासागरों  के महत्व और उनकी वजह से आने वाली चुनौतियों के बारे में विश्व में जागरूकता पैदा करना है। इसका उद्देश्य लोगों को जीवन में महासागरों के महत्व के बारे में बताना है इसके अलावा महासागरों से जुड़े पहलुओं जैसे खाद्य सुरक्षा , जैव विविधता ,पारिस्थितिक संतुलन , समुद्री संसाधनों  के अंधाधुन उपयोग , जलवायु परिवर्तन आदि पर प्रकाश डालना है।

विश्व महासागर दिवस(world oceans day 2023) Theme The Planet Ocean's Changing Tide.

विश्व महासागर दिवस मानाने के लिए हर साल एक थीम रखा जाता है।  इस साल (2023 ) में इसकी थीम है " 'ग्रह महासागर: ज्वार बदल रहे हैं" है। 
इसका उद्देश्य इस धारणा को आगे बढ़ाना है कि "महासागर को समर्थन की आवश्यकता है" और मछली की आबादी को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 

यह दुनिया के महासागरों में "एक नया संतुलन बनाने" के लिए प्रेरित करके और अपना -अपना सहयोग देने का समर्थन करता है । "महासागर ग्रह के 70% से अधिक को कवर करता है। यह हमारा जीवन स्रोत है, जो मानवता और पृथ्वी पर हर दूसरे जीव के भरण-पोषण का समर्थन करता है। महसागरों के संकरक्शन के लिए लोगों को जागरूक करना ही इस दिवस का उद्देश्य है।                                                 

महासागरों का महत्व

महासागर दो प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए सहसायक होते हैं;

1.  महासागर सूरज से निकलने वाली ऊर्जा को सोख लेते हैं और पृथ्वी के तापमान को कंट्रोल करते हैं , वे गर्म ट्रॉपिकल वाटर्स को उत्तर से दक्षिण की तरफ भेजते हैं और ठन्डे पानी को वापस इक्वेटर यानि भूमध्य रेखा पर भेजते हैं। इस तरह पृथ्वी पर कोई भी जगह न बहुत ज़्यादा गर्म रहती है न बहुत ज़ादा ठंडी  रहती है। पृथ्वी पर जलवायु को कंट्रोल करने मे मदद करते हैं।
2 . महासागर वाटर साइकिल को बनाये रखने में भी मददगार  होते हैं। भाप को बादल में बदलना और फिर पृथ्वी पर वापस बारिश के रूप में बरसाना।

जलीय जीवन पर प्रभाव

सबसे  पहले समुद्री प्रदूषण में देखा जाये तो समुद्र में कई तरह से  प्रदुषण होता है। यदि समुद्र में तेल रिसाव की स्थिति हो जाये तो  समुद्री जीवों पर भारी प्रभाव पड़ता है, जिसका सीधा प्रभाव मछुआरों पर पड़ता है। जो जीवन यापन के लिये इसी पर निर्भर रहते हैं। जब भी तेल रिसाव की दुर्घटना होती है तो समुद्री मछलियां, पक्षी आदि इसके संपर्क में आते ही उनकी श्वास प्रणाली संक्रमित हो जाती है और अंततः मृत्यु हो जाती है। गाढ़े तेल का असर समुद्री तटों पर भी पड़ता है ,तटों पर ज़हरीले रसायनो के तालाब बन जाते हैं जिनसे पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

महासागरों का महत्व मनुष्यों के लिए 

पृथ्वी पर सांस लेने के लिए हमे जितनी ऑक्सीजन चाहिए उसका आधा हिस्सा यानी 50 %महासागरों का योगदान होता है।हालाँकि जब भी हम ऑक्सीजन की बात करते हैं तो सबसे पहले पेड़-पौधों पर ही विचार करते हैं इसलिए की महासागरों की एहमियत के बारे में हम सोचते ही नहीं है और जानते ही नहीं हैं।
सूक्ष्म जीवों से लेकर विशाल जीवों तक महासागर जीव-जंतुओं की बेशुमार प्रजातियों का बसेरा है। फ़ायटोप्लैंक्टन जलीय खाद्य शृंखला में सबसे नीचे आते हैं। धरती पर सांस लेने के लिए हमे जिस ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है उसका आधा हिस्सा महासागर से प्राप्त होता है। कोरल लीफ लाखों सालों में बनते हैं, ये समुद्र में रहने वाले 25 फीसदी जीवों का बसेरा है। शैलफिश पानी से नाइट्रोजन को फ़िल्टर करती हैं वो कार्बन को सोखती हैं और तटों को स्थिर बनाने में मदद करती हैं। जीव और जलीय पौधे  एक दूसरे के अस्तित्व की रक्षा करते हैं । विशाल वेल मछली जब पानी की गहराइयों से निकल कर पानी की सतह पर आती हैं तो बहुत से पोषक तत्व ऊपर लाती हैं । इंसान एक साल में जितना CO2 पैदा करते हैं उसमे से 25 फीसदी महासागर सोखते हैं, लेकिन वो जितना CO2 सोखते हैं उतने ही अम्लीय होते चले जाते हैं इससे जलीय जीवन गड़बड़ता है । सिर्फ 7 %समुद्र संरक्षित है। मानवीय गतिविधियों से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है यदि हम इसे घटाने का  प्रयास करें और जलीय जीवन को बचाने का प्रयास करें तो हम ये संतुलन कहीं हद कायम कर सकते हैं। 
 
दुनिया भर में 30 अरब  से ज़्यादा लोग जो अपनी रोज़ी रोटी के लिए किसी न किसी तरह से महासागरों पर निर्भर हैं लेकिन महासागरों की हालत अच्छी नहीं है और इसके जिम्मेदार मनुष्य है। मनुष्य महासागरों में व्यापक पैमाने पर प्रदुषण फैला रहे हैं कहीं कच्चे तेल के रिसाव के जरिये , तो कहीं और दूसरे केमिकलों के जरिये इंसान ही अंधाधुन जलीय जीवों का शिकार कर रहे  हैं और स्तिथि यहाँ तक आ पहुंची है की समुद्र बुरी तरह से प्रदूषित हो गया है। 

जमीन पर हम जितना प्रदुषण फैलाते हैं उसका बड़ा हिस्सा नदियों के जरिये बह कर महासागरों में पहुँच रहा है ,इसमें सीवेज प्रद्योगिकी  के विषैले पानी से लेकर कई खतरनाक रसायन शामिल होते हैं। खेतों में इस्तमाल होने वाले कीटनाशक और रासायनिक खाद भी प्रदुषण फ़ैलाने में शामिल हैं। ये रसायन जब महासागरों में पहुंचते हैं तो जलीय इकोसिस्टम के संतुलन को बिगाड़ देते हैं जिसका सीधा असर जलीय जीवों और वनस्पतियों पर पड़ता है। 
हाल के दशकों में प्लास्टिक का कचरा बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। शोधकर्ताओं  का मानना है कि हर साल 80 लाख टन प्लास्टिक महासागरों में  पहुँच रहा है। ये प्लास्टिव मछलियों और दूसरे जीवों के अंदर जाता है,और जब हम उन्हें खाते हैं तो ये प्लास्टिक हमारे शरीर के अंदर भी पहुँच जाता है। जिसकी वजह से आज कई तरह की बिमारियों का सामना करना पड़ रहा है । 

परिवहन और व्यवसाय में हम भूमिका 

महासागर सदियों से आवाजाही का जरिया रहे हैं आज भी वह सामान ले जाने के सबसे अहम मार्गों में से एक हैं।  महासागरों के रास्ते ही दुनिया के अलग -अलग हिस्सों में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। बड़े -बड़े जहाज़ों से होने वाला रिसाव अक्सर ख़बरों में रहते है । इस तरह न जाने कितना कच्चा तेल महासागरों  में जा रहा है। कच्चे तेल को साफ़ करना बहुत ही मुश्किल होता है इसलिए इसके परिणाम पर्यावरण और जलीय इकोसिस्टम पर बहुत हानिकारक होते हैं।  

समुद्र में खनन भी प्रदुषण का एक अहम स्रोत है। समुद्र में चांदी,सोना ,ताम्बा , कोबाल्ट , र जिन्क जैसी बहुमूल्य धातुओं की खुदाई के लिए दुनिया के बड़े -बड़े देशों की  होड़ लगी है, लेकिन इसका महासागरों पर क्या असर होगा खनन कंपनियां इसकी ज़्यादा चिंता नहीं करती उन्हें चिंता बस मुनाफे की होती है। 

महासागर युद्ध का मैदान भी बनते हैं जिसकी वजह से कई जहरीले केमिकल और विस्फोटक पानी के नीचे बैठ जाते हैं। विश्व युद्ध 2 के समय के हज़ारों जहाज़ और विस्फोटक आज भी समुद्रों में पड़े हैं उनसे रिसने वाले रसायन जलीय इकोसिस्टम को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं । 

जलवायु परिवर्तन सिर्फ धरती पर नहीं बल्कि समुद्र में भी चुनौती बन गया है।  हम धरती पर जितना कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करेंगे  ये गैस महासागर में जाएगी जिससे पानी की PH वैल्यू कम होती है और सागरों का अम्लीयकरण बढ़ता है। धरती पर जंगल साफ़ किये जा रहे हैं जिससे जंगलों की CO2 सोखने की क्षमता घट रही है और ऐसे में महासागरों पर दबाव बढ़ रहा है।  

मसागरों के लाभ

महासागर मनुष्य जीवन और अन्य जीव-जंतुओं के जीवन को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते है। अगर हम अर्थव्यवस्था की बात करें  तो महासागर मानव जीवन के कुशल व्यापन के लिए करोड़ों लोगों के लिए रोज़गार देने में अहम् भूमिका निभाता है। अलग-अलग स्तरों पर रोज़गार के मौके उत्पन्न करवाता है, नौकरियां करने का मौका देता है, और लाखों लोगों और समुदायों को सुरक्षा और संरक्षा प्रदान कराता है, जो जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के प्रति संवेदनशील हैं।

महासागर समुद्री जीवन की एक विशाल श्रृंखला का घर है, जो जैव विविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। महासागर पौधों और जानवरों की अनगिनत प्रजातियों के लिए भोजन और आवास प्रदान कराता  है। यह पृथ्वी की जलवायु और मौसम के पैटर्न को विनियमित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो बदले में समुद्री जीवन के वितरण और प्रचुरता को प्रभावित करता है। महासागर कई महत्वपूर्ण दवाओं और अन्य उत्पादों का भी स्रोत है जिनका उपयोग मानव स्वास्थ्य देखभाल में किया जाता है।

"महासागर ग्रह के कम से कम 50% ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, यह पृथ्वी की अधिकांश जैव विविधता का घर है, और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। उल्लेख नहीं करने के लिए, महासागर हमारी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, अनुमानित 40 मिलियन लोगों को 2030 तक महासागर आधारित उद्योगों द्वारा नियोजित किया जा रहा है।

समुद्र को बचाने के लिए हम सबको अपना योगदान देना होगा जैसे की ; 
  1. सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करना छोड़े 
  2. समुद्र तट या सामुदायिक सफाई में शामिल हों
  3. समुद्री जीवन का शोषण करने वाली वस्तुओं से बचें
  4. आपकी थाली में क्या है, इसका ध्यान रखें
  5. प्रतिनिधियों और सांसदों से संपर्क करें
  6. कार्बन उत्सर्जन को कम करें
  7. समुद्र की यात्रा जिम्मेदारी से करें
विश्व महासागरीय दिवस में भाग लेने के भी कई तरीके हैं, जिसमे शामिल होने अथवा अपना योगदान देने के कई तरीके हैं ;-

1. विश्व महासागरीय दिवस गतिविधि या कार्यक्रम में शामिल हों
2. समुद्री भोजन (और मांस) छोड़ें
3. दोस्तों को इकट्ठा करें और एक महासागर फिल्म देखें
4. सिंगल यूज प्लास्टिक से परहेज करें
5. आप सोशल मीडिया पर अपने शैक्षणिक, पेशेवर और व्यक्तिगत नेटवर्क के साथ अद्यतन और सामग्री साझा करके विश्व महासागर दिवस प्रचार अभियानों में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं, विश्व महासागर दिवस वेबसाइट पर ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अपने स्वयं के सामुदायिक प्रयासों को उजागर कर सकते हैं
 

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