थोड़ा जोतै बहुत हेंगावै, ऊँच न बाँधै आड़।
ऊँचे पर खेती करै, पैदा होवै भाड़।।
शब्दार्थ- आड़- मेंड़। भाड़-भड़भाड़ (घमोय या सत्यानाशी, एक काँटेदार चितकबरा पत्ती वाला पौधा)।
भावार्थ- कम जोते और अधिक सिरावन दे, ऊँची जगह पर खेती करे और मेड़ न वाँधे तो वहाँ भड़भाड़ ही पैदा होंगे।
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