पंचनदा को विकास का मुद्दा बनाने वाले नेताओंं से खफा चंबलवासी

जब सपा बसपा के प्रत्याशी पंचनदा पर अपनी रायसुमारी कर रहे हो तो जाहिर है कि और दल के प्रत्याशी आखिर क्यों ना आगे आएं। माया सरकार में मंत्री रहे भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे का कहना है कि पंचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है एक समय डाकुओं के प्रभाव के चलते इस इलाके में विकास की गंगा नहीं बह सकी है लेकिन अगर उनको संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है तो वे पंचनदा को देश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में जोरदार कोशिश करेंगे। आजादी के बाद से देश दुनिया के एक मात्र पांच नदियों के संगम स्थल पंचनदा को सरसब्य बनाने की दिशा में किसी भी राजनैतिक दलों ने हिम्मत नहीं दिखाई। अब संसदीय चुनाव की जब दुदंभी बजने के साथ ही हर दल के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं तो हर कोई पंचनदा के विकास को मुद्दा बनाने में जुट गया है लेकिन चुनाव बीतने के बाद कोई भी नेता पंचनदा के विकास के वादे पर खरा नहीं उतरा है इसलिए चंबल के वासिंदे नेताओं के वादे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।

पंचनदा को विकास से वंचित रखने वाले राजनेताओं को सिर्फ चुनाव के दौरान ही इस पौराणिक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल की याद आती है। इटावा संसदीय सीट से बसपा प्रत्याशी अजय पाल जाटव का कहना है कि चंबल को पर्यटन केंद्र के तौर पर स्थापित किया जाएगा यही हमारी मुख्य मांग है और रहेगी, यदि पर्यटन केंद्र बन जाएगा तो बीहड़ी क्षेत्र के लोग खुशहाल हो जाएंगे। वे कहते हैं कि उन्होंने अपने बेहडांचल ऐजेंडे में ही पंचनदा के विकास को शमिल करके रखा हुआ है वे इस बात से बेहद खुश हैं कि उनके क्षेत्र में प्रकृति ने देश दुनिया के एक मात्र पांच नदियों के संगम स्थल को दे करके रखा हुआ है जहां पर देश दुनिया के पर्यटक इस स्थल को निहारने आ सकते हैं लेकिन इसे पंचनदा की बदकिस्मती कहेंगे कि विकास से वंचित पंचनदा को आज भी राजनेताओं ने अपने ऐजेंडे में शमिल नहीं किया है इसलिए उन्होंने पंचनदा के विकास का बीड़ा सांसद बनने की दिशा में उठाया हुआ है।

अजय पाल जाटव की ही तरह उनके प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी प्रेमदास कठेरिया भी कहते हैं कि जिस तरह से इटावा में लायन सफारी बनाई गई है उसी तरह से पंचनदा का भी विकास कराया जाए तो जाहिर है कि पंचनदा भी विकास से वचिंत नहीं रह पाएगा लेकिन वे यह भी कहने से चूकते नहीं कि उनके हाल के संसदीय काल में पंचनदा के विकास के लिए एक कार्ययोजना को लागू कराने की भूमिका तैयार की गई थी लेकिन उसको मध्य प्रदेश सरकार से एनओसी नहीं मिल सकी परिणामस्वरूप यह योजना ठंडे बस्ते में ही पड़ गई।

जब सपा बसपा के प्रत्याशी पंचनदा पर अपनी रायसुमारी कर रहे हो तो जाहिर है कि और दल के प्रत्याशी आखिर क्यों ना आगे आएं। माया सरकार में मंत्री रहे भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे का कहना है कि पंचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है एक समय डाकुओं के प्रभाव के चलते इस इलाके में विकास की गंगा नहीं बह सकी है लेकिन अगर उनको संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है तो वे पंचनदा को देश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में जोरदार कोशिश करेंगे।

कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती हंसमुखी शंखवार का कहना है कि 1989 से पहले कांग्रेस की सरकार के दौरान कई बार कार्ययोजनाए पंचनदा के विकास के बाबत बनाई गई लेकिन तकनीकी कारणों से पंचनदा के विकास की योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकी हैं।

वैसे पूरे चंबल क्षेत्र के विकास के लिए लोकसमिति पिछले पांच सालों से सक्रियता दिखा रही है लोकसमिति के अध्यक्ष सुल्तान सिंह पूरे चंबल इलाके में घूम-घूम कर चंबल को नया राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंबल का अगर हकीकत में ही विकास करना है तो 38000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र फल में फैले दस्यु प्रभावित इटावा, आगरा, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, धौलपुर और भरतपुर को मिला कर एक नए राज्य का सृजन करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से 17000 करोड़ के पैकेज की भी मांग की है। उनका कहना है कि चंबल में ऊंचे-ऊंचे मिट्टी के टीलों को काट कर उनका समतलीकरण करना चाहिए साथ ही पंचनदा पर छोटे चेकडैम बनाने चाहिए ताकि पानी को स्टोर किया जा सके। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार के भूमि संरक्षण विभाग के अलावा कई अन्य विभागों की ओर से हमेशा भूमि संरक्षण योजना के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इन खर्चों का कोई हिसाब-किताब हकीकत में नजर नहीं आता है क्योंकि यह सब कागजो में ही खर्च दिखलाया जाता है।

कालेश्वर महापंचायत के अध्यक्ष बापू सहेल सिंह परिहार का कहना है कि चुनाव की शुरूआत होने से पहले से कुछ प्रत्याशी पंचनदा स्थित कालेश्वर मंदिर के दर्शन करने आते रहे हैं और चुनाव की घोषणा के बाद सभी एक बार नहीं कई बार आ चुके हैं सभी के सभी पंचनदा को सरसब्य बनाने का भरोसा इस बार दे रहे हैं लेकिन हकीकत में इनके वादे ऐसे नहीं लग रहे हैं कि यह लोग पंचनदा के लिए विकास जैसा कुछ कर पाएंगे। दशकों से चुनाव मैदान में उतर रहे राजनेताओं की ओर से इस तरह के ही भरोसे दिए जाते रहे हैं और उनके भरोसे थोथे साबित होते रहे क्योंकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं इसलिए पंचनदा दशकों से विकास से वचिंत पड़ा हुआ है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य गजेंद्र सिंह परिहार का कहना है कि वोट की जब-जब बारी आई तो नेताओं ने पंचनदा और चंबल को मुद्दा बनाया लेकिन उसके बाद चंबल या फिर पंचनदा की ओर देखना भी मुनासिब नहीं समझा ऐसे में जाहिर है कि राजनेताओं के चरित्र को परखने की बड़ी जरूरत लग रही है।

पंचनदाचुनावी समर में राजनेताओं के लिए मुद्दा बनता पंचनदा धार्मिक एवं पौराणिक महत्व जुड़ा हुआ है यहां पर इस बात की किवदंती प्रचलित है कि इसी इलाके में महाभारत काल में पांडव ने अपना अज्ञात वास बिताया था।

दुनिया में दो नदियों के संगम तो कई स्थानों पर हैं जब कि तीन नदियों के दुर्लभ संगम प्रयागराज, इलाहबाद को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समझा जाता है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पांच नदियों के इस संगम स्थल को त्रिवेणी जैसा धार्मिक महत्व नहींं मिल पाया है।

प्रयाग का त्रिवेणी संगम पूर्णतः धार्मिक मान्यता पर आधारित है क्योंकि धर्मग्रन्थों में वहां पर गंगा,यमुना के अलावा अदृश्य सरस्वती नदी को भी स्वीकारा गया है, यह माना जाता है कि कभी सतह पर बहने वाली सरस्वती नदी अब भूमिगत हो चली है बहरहाल तीसरी काल्पनिक नदी को मान्यता देते हुए त्रिवेणी संगम का जितना महत्व है उतना साक्षात पांच नदियों के संगम को प्राप्त नहींं हैं।

पांच नदियों का यह संगम उत्तर प्रदेश में इटावा जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर बिठौली गांव में है। जहां पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्य के लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। इस संगम को पंचनदा या पंचनद भी कहा जाता है, यहां के प्राचीन मंदिरों में लगे पत्थर आज भी दुनिया के इस आश्चर्य और भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक धार्मिक विरासत का बखान कर रहे हैं। 800 ईसा पूर्व पंचनदा संगम पर बने महाकालेश्वर मंदिर पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहता है। मन में आस्था लिए लाखों श्रद्धालु कालेश्वर के दर्शन से पहले संगम में डुबकी अवश्य लगाते हैं। यह वह देव शनि है जहां भगवान विष्णु ने महेश्वरी की पूजा कर सुदर्शन चक्र हासिल किया था।

पंचनद बांध बीहड़ के सपनों में शामिल है। इस बांध पर सबसे पहली योजना 1986 में बनी थी। यहां बांध बनाने की बात इंदिरा गांधी ने कही थी। पंचनद बांध योजना के तहत उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में यमुना नदी पर औरैया घाट से 16 किमी अपस्ट्रीम में सढरापुर गांव में बैराज का निर्माण प्रस्तावित रही लेकिन बाद में यह योजना फाइलो में बंद इसलिए हो गई क्योंकि इस योजना से इलाकाई किसानों का बड़े स्तर पर नुकसान का आंकलन किया जाने लगा था। इस स्थल के अपस्ट्रीम में चंबल, क्वारी, सिंध और पहुज नदियां मिलती हैं। पंचनदा पर बने द्वापरकालीन महाकालेश्वर मंदिर को सुदर्शन तीर्थ के नाम से भी ख्याति अर्जित की है। इसी स्थान पर ओम कालेश्वर व महाकालेश्वर दोनों शिवलिंग एक ही स्थान पर स्थापित हैं। जो समूचे विश्व में अन्यत्र कहीं नहींं देखे जा सकते हैं। इसका उल्लेख पूर्ण पुराण के 82 वें अध्याय में उल्लेखित है। जिसकी सूक्ष्म कथा देवी भागवत में भी देखने को मिलती है। यहां पहले कभी सोवरण मंदिर हुआ करता था जो कलियुग के आरंभ होने के साथ ही पंचनदा के कुंड में चला गया और पुनः पाषाण पूजा में महाकालेश्वर की प्रतिमा प्रकट हुई जो आज इस मंदिर में स्थापित है।

भले ही चुनावी समर में उतरे राजनेताओं की ओर से पंचनदा के विकास का भरोसा दिया जा रहा हो लेकिन चंबल के वासिंदों को यकीन नहीं है कि राजनेताओं के वादों पर भरोसा किया जाए क्योंकि राजनेता तरह तरह की प्रलोभन वाले वादे करके वोट लेते है फिर लौट करके अपनी मजबूरियां जताने में लग जाते हैं।

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