गुजरात के सरकारी स्कूल हर साल बचाएंगे 10 करोड़ लीटर पानी

गुजरात के सरकारी स्कूल हर साल बचाएंगे 10 करोड़ लीटर पानी
गुजरात के सरकारी स्कूल हर साल बचाएंगे 10 करोड़ लीटर पानी

गर्मियों के चरम पर आने से इस समय लगभग पूरा भारत जल संकट से गुजर रहा है। कई स्थानों से चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़ रही है। कई इलाकों में स्वच्छ जल के अभाव में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जल संकट से जूझ रहे इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं, लेकिन गुजरात भी जल संकट से अछूता नहीं है।

पिछले साल गुजरात में भीषण जल संकट गहराया था। राज्य के 20 जिले इससे गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। 14 जिलों के 500 से ज्यादा गांवों में जलापूर्ति टैंकरों के माध्यम से की गई थी। कई गांव और कस्बें तो ऐसे थे, जहां बामुश्किल हफ्ते में केवल दो ही बार पानी आता था। 10 मई 2019 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक खबर में बताया गया कि राजकोट में एक दिन में केवल 20 मिनट की पानी की सप्लाई की जाती थी, जबकि वैकल्पिक दिनों में पानी की सप्लाई टैंकरों से की जाती थी। 

बीबीसी की एक खबर में बताया गया था कि 45 डिग्री के तापमान में भी महिलाएं पानी के लिए घड़े लिए जाती दिखाई देती थीं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि कई इलाकों पर लोगों को पानी का टैंकर भी 25 किलोमीटर दूर से मंगवाना पड़ता था। एक टैंकर पानी भी लगभग 2000 रुपये में मिलता था। यदि घर में कोई शादी कार्यक्रम हो तो हजारों रुपया पानी की व्यवस्था करने में ही लग जाता था। 30 अप्रैल 2019 को दैनिक जागरण में छपा था कि बनासकांठा जिले में लगाए गए 25 हजार हैंडपंप में से एक हजार हैंड़पंप खराब हैं। अब तक करीब 717 गांवों में टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही थी। करोड़ों रुपये की योजनाएं कागजी साबित हुई थीं। जलालपोर सहित पश्चिम विस्तार के लोग पांच रुपये में पानी का एक घड़ा खरीदने पर मजबूर थे। वलसाड जिले में भी जल संकट गहराया था, यहां करीब छह दिनों तक पानी की सप्लाई नहीं की गई थी।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक कच्छ और सौराष्ट्र के लोग जल संकट के कारण अपनी पशुओं के साथ पलायन करने लगे थे। लोगों का कहना था कि 30 साल में पहली बार इतना भीषण जल संकट गहराया है। कच्छ में बन्नी पश्चिम के अनेक गांवों में हजारों लोग पानी के अभाव में पलायन कर गए थे। ये लोग राज्य के साणंद और धोलका में टिके हुए थे। यही हालात उत्तर गुजरात के थे। गुजरात सरकार ने जल संरक्षण के क्षेत्र में काफी बढ़-चढ़कर काम किया है। वर्ष 2007-2008 में 6237 करोड़ रुपये की सुजलाम सुफलाम योजना के तहत पूरे गुजरात में जल संरक्षण के लिए कई तरह के काम हुए हैं। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी इतना बड़ा जल संकट गहराना कई सवाल खड़े करता है, लेकिन गुजरात सरकार ने जल संरक्षण और जल संचयन के क्षेत्र में कमर कस ली है। जिसके अंतर्गत वर्षा जल की बूंद बूंद को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में वर्षा जल संचयन परियोजना को ऑनलाइन लाॅन्च किया है। इसके तहत वडोदरा के 1000 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में जल संचयन परियोजना शुरू की है। इस दौरान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सुजलाम सुफलाम जल अभियान के बारे में जानकारी दी। टाइम्स आफ इंडिया की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि वडोदरा जिले के 1000 सरकारी स्कूलों में एक साल में पूरी होने वाली इस परियोजना को सिर्फ 9 महीने में पूरा किया गया। उन्होंने ये भी बताया कि मानसून के दौरान प्रत्येक स्कूल द्वारा एक लाख लीटर पानी का संचय होगा। इस प्रकार कुल 10 करोड़ लीटर से अधिक बारिश के पानी को व्यर्थ होने से बचाकर जमीन में संग्रह किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट से वर्षा जल को बचाने के अलावा, स्कूली छात्रों को जल संचयन का महत्व समझाने में भी मदद मिलेगी।


हिमांशु भट्ट (8057170025)

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Post By: Shivendra
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