दुर्गा ने मोर्चा संभाला तो हो गई निलंबित

नोएडा में अवैध खनन के खिलाफ पहली बार इतना हो-हल्ला मचा है। दरअसल, शासन ने उपजिलाधिकारी (सदर) दुर्गा शक्ति नागपाल को 28 जुलाई को निलंबित कर दिया था। शासन ने तर्क दिया कि एसडीएम ने रबूपुरा क्षेत्र के ग्राम कादलपुर में धार्मिक स्थल का निर्माण ढहा दिया जिससे धार्मिक उन्माद फैलने की आशंका थी। जबकि पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। नोएडा से अलीगढ़ बॉर्डर तक करीब 70 किमी मीटर क्षेत्र में यहां यमुना नदी बहती है। यमुना के इस खादर क्षेत्र में 60 गांव आते हैं। ये सभी गांव तहसील सदर एवं जेवर में हैं। यहां अवैध खनन के कारोबार ने पिछले दस वर्षों में तेजी पकड़ी है। दरअसल, नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा शहर के अस्तित्व में आने के बाद इन दोनों शहरों में तेजी से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हुआ। बालू की मांग जरूरत से ज्यादा बढ़ गई। इसके मद्देनजर खनन माफिया ने सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी। यही नहीं, दिल्ली और एनसीआर में भी बालू की बढ़ती मांग ने अवैध रेत खनन को मुनाफे का कारोबार बना दिया। हालांकि इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यमुना के आसपास जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी के पास भू-जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। विभिन्न स्थानों पर नदी का स्वरूप बिगड़ गया है।

नोएडा में अवैध खनन के खिलाफ पहली बार इतना हो-हल्ला मचा है। दरअसल, शासन ने उपजिलाधिकारी (सदर) दुर्गा शक्ति नागपाल को 28 जुलाई को निलंबित कर दिया था। शासन ने तर्क दिया कि एसडीएम ने रबूपुरा क्षेत्र के ग्राम कादलपुर में धार्मिक स्थल का निर्माण ढहा दिया जिससे धार्मिक उन्माद फैलने की आशंका थी। जबकि पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। करीब दस माह पहले जनपद में एसडीएम का पद संभालने के बाद नागपाल ने अवैध खनन माफिया के नेटवर्क को तोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। सरकारी एवं राजनीतिक आशीर्वाद प्राप्त होने के कारण खनन माफिया पर बड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। सिंचाई विभाग ने कुछ माह पहले 55 खनन माफिया की सूची जिला प्रशासन को सौंपी थी। प्रशासन ने पुलिस को इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, मगर मामला निरंतर टलता रहा। फिर दुर्गा शक्ति ने मोर्चा संभाला और खनन माफिया के दुष्चक्र को भेदने में सफलता भी प्राप्त की। नतीजा जो होना था वही हुआ। यह बात और है कि दुर्गा शक्ति को निलंबित करने के बाद पुलिस ने भी सक्रियता बढ़ाई है। आयकर विभाग भी खनन माफिया पर शिकंजा कसने की कवायद में जुट गया है।आयकर विभाग के नोएडा रेंज के संयुक्त आयुक्त बीके दीक्षित ने जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह को पत्र भेजकर खनन माफिया की सूची मांगी है। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग की मंशा खनन माफिया की आय का विवरण टटोलने की है।

नियम-कानून ताक पर


खनन विभाग के मुताबिक, नदी के खादर क्षेत्र में कहीं भी पांच एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में खनन नहीं किया जा सकता। खनन के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में अधिकतम साढ़े चार फुट की गहराई तक ही खुदाई की जा सकती है। जेसीबी या पॉपलैन जैसी बड़ी मशीनों के इस्तेमाल पर रोक है मगर खनन माफिया के आगे तमाम नियम-कानून बेमानी साबित हो रहे हैं। यमुना के खादर क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर 10 से 15 फुट तक की गहराई तक खनन किया जा रहा है। खुदाई में जेसीबी और पापलैन मशीनों का प्रयोग होता है। कई जेसीबी और पापलैन मशीनें जब्त की गई हैं।

पुलिस के खिलाफ जांच ठंडे बस्ते में


पुलिस और खनन माफिया की मिलीभगत के प्रमाण कुछ दिन पहले सामने आए थे। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कोतवाली ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के ग्राम बादौली की सर्विस रोड पर करीब तीन सप्ताह पहले अवैध खनन की शिकायत मिली थी। खनन विभाग ने इसकी सूचना पुलिस को दी। आरोप है कि पुलिस ने छापामार टीम के वहां पहुंचने से पहले माफिया के वाहनों को हटवा दिया था। इसकी शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने एसएसपी को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी। 23 जुलाई को यह रिपोर्ट डीएम को मिलनी थी, मगर रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं हो सकी है।

सूत्रों का कहना है कि खनन माफिया को लंबे समय से पुलिस संरक्षण देने के अलावा समय-समय पर सूचनाएं लीक कर बचाव भी करती रही है। सालभर पहले तत्कालीन खनन निरीक्षक आशीष कुमार ने शासन को पत्र भेजकर विभाग के लिए अलग से पुलिस फोर्स का बंदोबस्त करने की मांग की थी। शासन ने सीधे कोतवाली के बजाय पुलिस लाइन से जरूरत पड़ने पर फोर्स लेने की व्यवस्था कर दी थी।

सिर्फ रायपुर में सरकारी ठेका


जिले में बालू खनन के लिए वर्ष-2003 में ठेका छोड़ा गया था। खनन विभाग ने ग्राम रायपुर, असगरपुर-जागीर और चकबसंतपुर में ठेका दिया था। 2 नवंबर 2003 को रायपुर में गाटा संख्या-220 में 181.0479 एकड़ भूमि पर नेशनल सैंड सप्लाई कंपनी को ठेका मिला। असगरपुर-जागीर के गाटा संख्या-783/2 व 783/3 के क्षेत्रफल 47 एकड़ में ओरिएंट सैंड सप्लाई कंपनी को ठेका दिया गया, जबकि चकबसंतपुर गांव में गाटा संख्या 30/2 व 30/1 के क्षेत्रफल 156 एकड़ भूमि पर ओखला सैंड सप्लाई कंपनी को बालू खनन का ठेका मिला था।

यह ठेका 2 नवंबर 2003 से 1 मई 2013 तक के लिए वैध था। मई में ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद खनन विभाग ने रायपुर गांव में नेशनल सैंड सप्लाई कंपनी के ठेके का रिनुअल कर दिया जो आगामी 15 सितंबर तक प्रभावी है। इससे साफ है कि जिले में एकमात्र रायपुर की 181 एकड़ भूमि पर वैध तरीके से बालू खनन का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा जहां कहीं भी बालू खनन का कारोबार हो रहा है, वह गैर कानूनी है।

दस महीने में 500 छापेमारी


आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने अपने 10 महीने के कार्यकाल में खनन विभाग ने पांच सौ से ज्यादा छापामार कार्रवाई कर 480 डंपर जब्त किए थे। इस दौरान विभाग ने छह करोड़ 78 लाख रुपए का राजस्व वसूला।

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