दोहरे संकट में सारस पक्षी

देश में सारस की 6 प्रजातियाँ है। इनमें से 3 प्रजातियाँ इंडियन सारस क्रेन,डिमोसिल क्रेन व कामन क्रेन हैं, भारतीय उपमहाद्वीप में सारस पक्षियों की अनुमानित संख्या 8 हजार है, अनुकूल पानी के जल क्षेत्र, धान के खेत, दलदल, तालाब, झील व अन्य जल स्रोत में पाए जाते हैं। दल-दली क्षेत्रों में पाई जाने वाली घास के टयूबर्स, कृषि खाद्यान्न, छोटी मछलियाँ, कीड़े-मकोड़े, छोटे सांप, घोंघे, सीपी आदि भोजन के तौर पर सारसों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है। राज्य पक्षी का दर्जा पाए सारस पक्षी की तादाद लगातार घट रही है। सारस पक्षी पर दोहरी मार पड़ रही है एक ओर करंट से सारस पक्षियों की मौतें होना आम बात हो गई दूसरे उनके प्राकृतिक वास यानि वेटलैंड का स्वरूप बिगड़ता चला जा रहा है इस कारण सारस पक्षी पर दोहरी मार पड़ रही है। बताते चलें कि एक समय उत्तर प्रदेश का इटावा देश का सबसे अधिक सारस पक्षी वाला जिले के तौर पर गिना जाता रहा है।

देश दुनिया में सबसे अधिक सारस पक्षी पाए जाने वाले उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सारस पक्षी पर इन दिनों दोहरा संकट आया हुआ है। एक ओर जहां बिजली के करंट की जद में आने से सारस पक्षी मौत के शिकार हो रहे हैं वही दूसरी ओर उनके वास स्थल यानि वेटलैंड पर कब्जे भी सबसे घातक माने जा रहे हैं।

इटावा में खासी तादाद में पाए जा रहे सारस पक्षी पर बिजली के करंट के अलावा उनके वास स्थलों को कब्जा करने की मार पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित विद्युत लाइन सारस पक्षी के लिए काल बन कर सामने आई है। इटावा में आए दिन विद्युत करंट से लगातार मौतें हो रही हैं। कई दर्जनों सारस पक्षियों की मौतें हो चुकी हैं।

जिससे ग्रामीण खासे चिंतित दिख रहे हैं। बिजली के करंट लगने से सारस पक्षी के मरने की घटनाएँ इटावा जिले के भरथना, उसराहार और सिविल लाइन इलाकों में घट चुकी हैं। इटावा जिले में वैसे तो सारस पक्षी हमेशा ही खासी तादाद में पाया जाता है लेकिन इन दिनों सारस पक्षी की चपेट में आने से तमाम सारसों की मौतों ने ग्रामीणों को खासा चिंता में डाल दिया है।

उसराहार इलाके में अमूमन खेत खलिहान में सारस पक्षी गांव वालों को देखने को मिलते रहते हैं लेकिन खेत खलिहान के ऊपर से गुजरे विद्युत तारों की चपेट में आने से सारसों की मौत हो जाती है। उसराहार के सुधीर कुमार का कहना है कि ज्यादातर देखा जाता है वेटलैंडों के ऊपर से गुजरी विद्युत लाइनें घातक बनती जा रही हैं।

वन्य जीवों के हितों में काम कर रही संस्था सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के सचिव डॉ. राजीव चौहान का कहना है कि अमूमन इलाकाई भ्रमण के दौरान इस तरह की खबरें मिलती रहती हैं कि बिजली के तारों में फंस कर सारस पक्षी की मौत हो गई है जब इस तरह के मामले सामने आते हैं तो जाहिर है कि तकलीफ़ होती है लेकिन इस संकट से ऊबर पाने के लिए कोई इंतजामात नहीं होते हैं जिससे सारस पक्षी को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि ज्यादातर वेटलैंड के ऊपर से विद्युत तार गुजरे हुए हैं इसी कारण से सारस पक्षी मौत के शिकार हो जाते हैं।

यह इस तरह का संकट है जो पक्षी विशेषज्ञों को चिंता में जरूर डालता है। डॉ.राजीव का कहना है कि सारस पक्षी की करंट की चपेट में आकर मरने का मामला बेहद खतरनाक होता जा रहा है।

संकट में सारस पक्षीइलाकाई लोगों का मत है कि सारस के झुंड जब आसमान से पानी की तलाश में उतरते हैं तो आसपास बिजली के तारों की चपेट में आने से मौत के मुंह में समा जाते हैं ऐसे में इन सारसों को बचाने का कोई उपाय नहीं समझ में आता है इसी वजह से महीने में 1 से लेकर 3 की तादाद में सारस पक्षी हर माह मरते जाते हैं।

इटावा के जिला वन अधिकारी मानिक चंद्र यादव का कहना है कि वैसे तो पूरे इलाके में वन विभाग की ओर से सरकारी और गैर सरकारी लोगों की एक लंबी चौड़ी टीम बना कर रखी हुई है लेकिन पक्षियों को बिजली के तारों की ओर जाने से रोक पाना संभव नहीं हो सकता क्योंकि पक्षी तो आज़ाद होते हैं ऐसे में उनकी मौत हो जाना एक स्वाभाविक प्रकिया की हिस्सा है। फिर अगर कहीं पर किसी सारस की मौत होती है तो उसको उठवा करके पोस्टमार्टम कराने के बाद बाकायदा अंतिम संस्कार करवाने के लिए विभाग हमेशा से तत्पर है।

अमर प्रेम का प्रतीक सारस पक्षी ने दुनिया भर में इटावा जिले की पहचान करा रखे हैं। इटावा जिले के खेतों में घूमते देखे जाते सारस आम बात हैं। वर्ष 1999 में संपादित सारस गणना के मुताबिक भारतीय उपमहादीप में सारस पक्षी के करीब 8 हजार सदस्यों के जीवित होने का अनुमान लगाया गया।

इनमें 200 नेपाल, 4 पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में देखे गए 2 सारस पक्षियों के अतिरिक्त शेष सभी भारत में ही रहते हैं। दुनिया में सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी किसानों का मित्र है। करीब 12 किलो वजन वाले सारस की लम्बाई 1.6 मीटर तथा जीवनकाल 35 से 80 वर्ष तक होता है। सारस वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनूसूची में दर्ज हैं।

देश में सारस की 6 प्रजातियाँ है। इनमें से 3 प्रजातियाँ इंडियन सारस क्रेन,डिमोसिल क्रेन व कामन क्रेन हैं, भारतीय उपमहाद्वीप में सारस पक्षियों की अनुमानित संख्या 8 हजार है, अनुकूल पानी के जल क्षेत्र, धान के खेत, दलदल, तालाब, झील व अन्य जल स्रोत में पाए जाते हैं। दल-दली क्षेत्रों में पाई जाने वाली घास के टयूबर्स, कृषि खाद्यान्न, छोटी मछलियाँ, कीड़े-मकोड़े, छोटे सांप, घोंघे, सीपी आदि भोजन के तौर पर सारसों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है।

संकट में सारस पक्षीबताते चलें कि आज़ादी पूर्व अंग्रेज कलेक्टर ए.ओ.हृयूम के समय में इस क्षेत्र में साइबेरियन क्रेन भी आते थे,जिसको देखने के लिए अब भरतपुर पक्षी विहार जाना पड़ता है क्योंकि 2002 साल में आखिरी बार साईबेरियन क्रेन का एक जोड़ा देखा गया था। इटावा के कार्यकाल में अपने कामकाजी अंदाज के चलते ए.ओ.हयूम की पहचान पक्षी विज्ञानी के तौर पर भी पूरी दुनिया में सामने आ चुकी है।

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