राजीव नयन बहुगुणा

राजीव नयन बहुगुणा
गंगा के लिए एक आहुति
Posted on 15 Jun, 2011 12:47 PM

एक ओर गंगा को लेकर सरकार और समाज की चिंताएं सातवें आसमान पर हैं, दूसरी तरफ इसी मुद्दे को लेकर 19 फरवरी से अनशन कर रहे एक युवा संन्यासी की ओर सबका ध्यान तब गया, जब उन्होंने इस संसार को छोड़ कर चले गए। हालत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में ला पटका। उन्हें राज्य के एक बड़े अस्पताल में करीब 10 दिन पहले तब दाखिल किया गया, जब उनके बच पाने की उम्मीद नहीं थी। हरिद्वार के स्वामी निगमानंद भले ही कोई ग्लैमरस बाबा नहीं थे, लेकिन गंगा को लेकर उन्होंने जो मुद्दे उठाए थे, वे बुनियादी और गंभीर थे। हरिद्वार में गंगा अपनी गति और त्वरा को नियंत्रित कर देती है। पहाड़ों में अठखेलियां करती उसकी चंचल छवि यहां पहुंचकर एक शांत, गंभीर और लोकमंगलकारी सरिता में परिवर्तित हो जाती है।

गंगा में अवैध खनन
लघु ही सुंदर है
Posted on 14 Mar, 2011 09:12 AM

जापान की आपदा का पहला सबक यह है कि विज्ञान और तकनीकी के दंभ में हम प्रकृति विजेता होने का भ्रम न पालें। इस सृष्टि में मृत्यु के बाद भूकंप ही ऐसा सत्य है, जिसे रोका नहीं जा सकता। फर्क सिर्फ इतना है कि मौत से बचा नहीं जा सकता, लेकिन भूकंप से बचा जा सकता है।

जब भूकंप या सुनामी से दुनिया का कोई एक कोना दहलता है, तो दूसरा कोना उससे कतई अछूता नहीं रह सकता। आज अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आई थरथराहट सुदूर एशिया को झकझोर देती है, तो जापान की प्राकृतिक आपदा का तात्कालिक प्रभाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। जापान के पास भूकंप के प्रभावों से निपटने की सर्वश्रेष्ठ युक्ति है। लेकिन यह भूकंप और उसके फलस्वरूप आई सुनामी जापान को बुरी तरह तोड़-मरोड़ गई। बेशक रिक्टर पैमाने पर 8.9 का भूकंप भयावह होता है। लेकिन जापान के विज्ञानियों और तकनीशियनों ने इस ओर इससे भी बड़े भूकंप की आशंका के आधार पर अपने भवनों, पुलों और ओवर ब्रिजों के ढांचे तैयार किए थे। पर उद्वेलित प्रकृति के कोप को किसी भी प्रकार का तकनीकी लाघव नहीं झेल पाया।

जापान की आपदा का पहला सबक यह है कि विज्ञान और तकनीकी के दंभ में हम प्रकृति विजेता होने का भ्रम न पालें। इस सृष्टि में मृत्यु के बाद भूकंप ही ऐसा सत्य है,

लोक और विज्ञान का संगम
Posted on 06 Mar, 2011 09:18 AM

 

 

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