हिंदी वाटर पोर्टल टीम

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क्यों सूखा अराल सागर
Posted on 04 Oct, 2014 01:13 PM

कजाकिस्तान और उजबेकिस्तान के बीच करीब 55 लाख साल पहले कीजीलकुम मरुस्थल में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अराल सागर पूरी तरह सूख चुका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के टेरा उपग्रह के द्वारा भेजी गई तस्वीरों से पता चला है कि अराल सागर सूख गया है।
सूख गया अराल सागर
भारत में स्वच्छता और स्वास्थ्य पर फैक्ट शीट
Posted on 16 Dec, 2013 03:07 PM
नवंबर 2013
विश्व अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा भारत दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि, यह मानव विकास सूचकांक पर 134वें स्थान पर फिसल गया है।

भारत : खुले में शौच की वैश्विक राजधानी

गंदगी पर बैठा - शहरी भारत
Posted on 16 Dec, 2013 01:29 PM

शहरी गरीबों के लिए शौचालय निर्माण के लिए कोई महत्वपूर्ण सरकारी योजना नहीं है। ऐसी अकेली योजना ह

संवैधानिक तंत्र का बदलता चेहरा और मीडिया के विषय पर सातवाँ मीडिया सम्मेलन
Posted on 02 Jun, 2013 11:31 AM
सुखतवा , केसला (इटारसी)
29-30 जून, 1 जुलाई 2013
साथियों
ज़िन्दाबाद !


विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला साल-दर-साल आगे बढ़ता ही जा रहा है | हालाँकि इस बार हम अपने तय समय से थोडा देर से करने जा रहे हैं, लेकिन कई बार मार्च में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्र और बजट की आपाधापी में फंसने के कारण बहुत सारे साथी आ नहीं पाते थे | तो इसबार सोचा थोड़ा लेट चलें, ताकि सभी लोग एक साथ मिल सकें |

आप सब जानते ही हैं कि यह सफ़र सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी से शुरू हुआ | बांधवगढ़, चित्रकूट, महेश्वर, छतरपुर, फिर पचमढ़ी के बाद इस बार हम केसला में यह आयोजन करने जा रहे हैं | इस बार कई दौर की बैठकों के बाद केसला संवाद के लिए जो विषय चुना गया है, वह है |

संवैधानिक तंत्र का बदलता चेहरा और मीडिया


कृपया विषय व स्थान चयन के लिए अपनी-अपनी राय दर्ज कराएँ..और आखिर में इस निवेदन के साथ कि आपकी उपस्थिति इन विषयों पर सार्थक हस्तक्षेप के साथ सम्मेलन को सफल बनाएगी|

तृतीय अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव का उद्घाटन
Posted on 08 Feb, 2013 06:35 PM
होशंगाबाद, 8 फरवरी 2013। नर्मदा और तवा के संगम स्थल बांद्राभान में ‘तृतीय अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव’ की शुरुआत हुई। नदियों की संरक्षण और शुद्धिकरण की दिशा तय करने के लिए बांद्राभान में चार दिवसीय नदी महोत्सव आज 8 फरवरी से शुरू होकर 11 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में 60 से भी अधिक नदियों पर काम करने वाले लोग भागीदारी कर रहे हैं। विभिन्न नदियों और पानी पर काम करने वाले लगभग 1000 लोग इस पूरे आयोजन में भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन आरएसएस के सरसंघसंचालक मोहन भागवत ने किया और सत्र की अध्यक्षता साहित्यकार और नर्मदा समग्र के अध्यक्ष अमृतलाल बेगड़ ने की। उद्घाटन सत्र में बोलते हुए श्री बेगड़ ने कहा कि जीवन की उत्पत्ति पानी में हुई। पर धीरे-धीरे पानी से जीवन समाप्त होता जा रहा है। कार्यक्रम का दृष्टिकोण रखते हुए भागवत जी ने कहा, ‘नदियों की चिंता सारे विश्व की चिंता है। मूल बात दृष्टिकोण की है, दृष्टि गड़बड़ हो जाने से हम प्रकृति के साथ जीना भूल गए हैं जिससे मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ गया है।’ उद्घाटन सत्र का संचालन दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान से जुड़े अतुल जैन ने किया और संयोजन नर्मदा समग्र के अनिल माधव दवे ने किया।

अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव
तालाब से खुशहाल हुआ किसान
Posted on 20 May, 2013 02:54 PM
सन् 2005 में महोबा में आया सूखा बृजपाल सिंह के लिए एक नया संकट का दौर लेकर आया। उनके कुओं में पानी सूख गया। पीने के पानी की किल्लत इतनी भयावह हो गई कि उन्हें अपनी 6-9 लीटर दूध देने वाली भैसें भी औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी और वे उस साल कोई फसल भी ले नहीं सके। उनके खेतों के बीच से मिट्टी कटाव की वजह से बरसाती नाली बनने लगी थी। भूजल की अनुपलब्धता, बरसाती नाली से मिट्टी का कटाव एवं ज्यादा पानी आना; ये कुछ ऐसे कारण थे, जिससे दोनों फसल ले पाना संभव नहीं था। बृजपाल सिंह पुत्र श्री रामसनेही सिंह ग्राम बरबई,कबरई महोबा के एक किसान हैं। लगभग पचास की उम्र पार कर चुके बृजपाल सिंह और उनके परिवार के पास 34.6 एकड़ की खेती है। बृजपाल सिंह के गांव बरबई में कोई कैनाल (नहर) नहीं है। भूजल की उपलब्धता काफी नीचे है। बृजपाल सिंह ने अपने खेत को सिंचित करने के लिए डीप बोरवेल और बोरवेल का सहारा लेने की कोशिश की। अपने खेत के अलग-अलग हिस्सों में तीन बोरवेल लगभग 200 फिट के करवाए लेकिन तीनों असफल रहे। उनमें पानी नहीं उपलब्ध हो सका चौथा बोरवेल उन्होंने 680 फिट गहराई तक करवाया,उन्हें उम्मीद थी कि इतनी गहराई तक तो पानी मिल ही जायेगा पर उनकी उम्मीद पर पानी फिर गया और उन्हें पानी नहीं मिला।
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