डॉ. कश्मीर उप्पल

डॉ. कश्मीर उप्पल
रामकुमार भाई: खेती किसानी को समर्पित जीवन
Posted on 06 Aug, 2012 04:24 PM

सन् 1980 में निटाया में आयोजित 10 दिवसीय पर्यावरण शिविर में भी रामकुमार चौधरी प्रमुख कर्ताधर्ताओं में थे। इस शिव

उपजाऊ मिट्टी खाते शहर
Posted on 13 Jul, 2012 04:53 PM

वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि आर.ओ. पद्धति से भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, क्रोमियम, लोहा आदि की तरह यूरेनियम को दूर भी नहीं किया जा सकता है। पंजाब सरकार ने कई गांवों में आर.ओ. सिस्टम लगाये हैं जहां गरीबों को न्यूनतम मूल्य पर पीने का पानी दिया जाता है। पर पशु तो वही पानी पीते हैं जो तीन सौ फुट नीचे से खींचा जाता है। पशुओं के दूध में दूषित पानी का असर लोगों तक भी पहुंचता रहता है। पंजाब के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर.ओ. सिस्टम से साफ किया पानी पीना समृद्ध और पढ़ा-लिखा होने की निशानी है। क्या यही है हमारा पंजाब?

रासायनिक खेती, नदियों और भूजल स्तर जैसे पर्यावरणीय विषयों पर लिखना किसी अंधेरे में चीख की तरह लगता है। टी.वी. और समाचारपत्रों में बढ़ता तापमान प्रतिदिन हेडलाइन्स बनता है। उसके साथ ही पंखों, कूलरों और एयरकंडीशनर के विज्ञापन भी बढ़ जाते हैं और उनकी बिक्री भी। परन्तु ओजोन-परत और घटता वन क्षेत्र हमारी चिन्ता का विषय नहीं बनता। शहरों और गांवों में नित नई खुलती दवाई की दुकानें अब हमें नहीं डरातीं। सिने अभिनेता आमिर खान ने 24 जून के ‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम में रासायनिक खेती के ‘अभिशापों’ और जैविक खेती के ‘वरदानों’ को देश के सम्मुख रखा। लेकिन अभी तक समाज और सरकार की ऐसी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि कोई रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से चितिंत हो। पंजाब को आधुनिक कृषि का मॉडल मानकर उसका अनुकरण करने से पूरे देश में भी रासायनिक और यांत्रिक खेती के दोष फैल गए हैं।
Pesticide spraying
नदियों के साथ जुड़ा है देश का भविष्य
Posted on 05 Nov, 2011 03:00 PM

विगत दिनों इलाहाबाद में नदियों के पुनर्जीवन को लेकर महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमे

वन, वृक्ष और नदी का सरकारी प्रबंधन
Posted on 24 Sep, 2011 10:21 AM

भारत में प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और स्वामित्व कमोवेश सरकारी विभागों के ही हाथ में है। इस

रासायनिक खेती: पैरों से व्हीलचेयर तक का सफर
Posted on 22 Apr, 2011 01:22 PM

‘लोक लहर फाउन्डेशन’ ने गांवों के बच्चों को चण्डीगढ़ प्रेस क्लब के सामने प्रस्तुत किया था। यह ब

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