नरेन्द्र देवांगन

नरेन्द्र देवांगन
खतरे में हैं प्रवासी पक्षी
Posted on 12 Feb, 2017 11:36 AM

शायद ही दुनिया का कोई आबाद कोना हो, जहाँ किसी न किसी तरह के पंछी न होते हों। यहाँ तक कि बर्फीला साइबेरिया भी पंछियों का साक्षी है। ये पंछी समय, काल और परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। अपना जीवन बचाने के लिये ये अपने मूल स्थान से हजारों किलोमीटर दूर जाने से भी परहेज नहीं करते। ऐसी लम्बी यात्राएँ ये करते कैसे हैं, यह आज भी एक रहस्य है।
मछलियों का प्रणय संसार
Posted on 23 Aug, 2011 02:22 PM

विभिन्न प्रकार की मछलियों के परस्पर संभोग से पैदा होने वाली पीढ़ी को जो रूप-रंग प्राप्त होता है

दुनिया का कूड़ाघर बनता भारत
Posted on 23 Aug, 2011 10:10 AM

भारत की छवि दुनिया में सबसे बड़े कबाड़ी के रूप में भी उभर रही है। इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी

कचरे से तैयार करें उत्तम खाद
Posted on 13 Aug, 2011 03:13 PM

जानवरों के मल-मूत्र, बिछावन और वनस्पति कचरों का संग्रह तब तक इन छोटे-छोटे गड्ढों में करना चाहिए

वर्षा जल संचयन से रोकिए बरसात का पानी
Posted on 13 Apr, 2015 09:10 AM
किसी क्षेत्र के ऊपर वर्षा के रूप में प्राप्त कुल जल उस क्षेत्र का
बाढ़-सूखे की चपेट में मानव जीवन
Posted on 09 Dec, 2010 02:47 PM
आज देश का अधिकांश भाग-सूखा-अकाल की चपेट में है । देश का बड़ा भाग जहां एक ओर सूखाग्रस्त है, वहीं दूसरी ओर कुछ भाग में बाढ़ एवं तूफान ने तबाही मचाई हुई है । विशेषज्ञों का मत है कि किसी भी भू-भाग का पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कम से कम एक तिहाई भू-भाग पर वन होने चाहिए । पहाड़ी क्षेत्र में तो ६० प्रतिशत भू-भाग पर ही जंगल हैं । वैज्ञानिकों का मत है कि जिस क्षेत्र का वन क्षेत्र १० प्रतिशत से कम
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