दिनेश पंत

दिनेश पंत
संकट में है उत्तराखंड के वन्य प्राणियों का अस्तित्व
Posted on 14 Aug, 2012 09:58 AM

विशेषज्ञ मानते हैं कि तस्करों द्वारा गुलदार के अवैध शिकार के साथ ही जंगलों में लगने वाली आग, विकास के नाम पर हो

रंग ला रही है कापड़ी की मुहिम
Posted on 07 Feb, 2012 04:34 PM
बंजर भूमि में बहार बिखेर कर सोर घाटी पिथौरागढ़ को हरा भरा बनाने के संकल्प के साथ पिछले 28 सालों से निरंतर पर्यावरण संरक्षण अभियान में जुटे हुए हैं ललित मोहन कापड़ी। विज्ञान स्नातक 45 वर्षीय इस शख्स ने आज से 28 साल पहले जो मुहिम शुरू की थी वह अब रंग लाने लगी है। एकला चलो से शुरू हुआ उनका अभियान अब जन अभियान में तब्दील हो रहा है। नगर के विभिन्न आयु वर्ग व विचारधारा के लोग अब उनके द्वारा शुरू वृक्षार
गंगा: गंगोत्री से गंगासागर तक मैली ही मैली
Posted on 19 Dec, 2011 04:15 PM

गंगा नदी के तट पर स्थित हरिद्वार में हो रहे महाकुंभ में तो हर रोज लाखों लोग डुबकी लगा रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि लोगों की जीवन रेखा रही गंगा की जीवन रेखा तो कम होती जा रही है। भगीरथ ने अपने प्रयासों से गंगा को पृथ्वी पर अवतरित तो कर दिया लेकिन इसकी पवित्रता को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकारों की ही नहीं वरन् हम सब की होती है। अगर गंगा का अस्तित्व नहीं रहा तो उनका क्या होगा जो गंगा की बदौलत ही जी रहे हैं। जिनकी सुख-समृद्वि और अनवरत चलने वाली जीवन की धारा इसी पर टिकी है।

जो स्वयं एक इतिहास हो, जो किसी देश की परम्परा, पुराण, कला, संस्कृति व जीवन से जुड़ी हो, जिसे विशिष्ठ नदी होने का गौरव हासिल हो, जिससे देश की जनता ही नहीं विदेशी भी प्यार करते हों, जो देश की समृद्धि से जुड़ी हो, जो लोगों की आशा-निराशा, हार-जीत, यश गौरव से जुड़ी हो, जिसने किसी देश की विविधता भरी संस्कृति का पोषण किया हो, जो सभी नदियों का नेतृत्व करती हो, जिसे माँ का दर्जा मिला हो, जिसने चट्टानों और हिमघाटियों से निकल कर मैदानों को सजाया-संवारा हो, जिसने लोगों की प्यास बुझाई, खेतों में ही नहीं घरों में भी हरियाली लहराई हो, यहां उसी मुक्तिदायिनी, जीवनदायिनी गंगा की बात हो रही है।
गंगा भारत वर्षे भातृरूपेण संस्थिता/नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
जैसे गुणगान करते-करते नहीं थकते।
चीड़ की पत्तियां कोयले का विकल्प
Posted on 29 Sep, 2011 09:52 AM

पहले इसको विशेष खास ड्रम के भीतर कम आक्सीजन की स्थिति में जलाया जाता है। तारकोल जैसे रूप में पर

जंगल का विनाशक बना आय का साधन
Posted on 15 Sep, 2011 10:52 AM

कुछ अध्ययनों में यह भी सिद्ध हुआ है कि पिरूल में कुछ ‘फाइटोटाक्सिन्स’ नामक हानिकारक रसायन होते

हिमालय को स्थिर ही रहने दीजिए
Posted on 12 Sep, 2011 01:50 PM

पहले वनों को आग के हवाले झोंका जा रहा है फिर वनीकरण का खेल खेला जा रहा है। पानी का संग्रहण करने

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